
सेना की फर्जी मुहर, सोने और ड्रग्स की तस्करी... ऐसे पकड़ा गया केरल से भूटान तक फैला स्मगलर गैंग
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केरल से भूटान तक फैले एक बड़े तस्करी गैंग का पर्दाफाश हुआ है. लग्जरी कारों के जरिए सोना, ड्रग्स और करेंसी की तस्करी होती थी. ऑपरेशन नुमखोर के तहत एक ही दिन में 36 वाहन जब्त किए गए हैं. जानिए कैसे चल रहा था ये स्मगलिंग नेटवर्क.
Operation Numkhor: केरल में कस्टम विभाग ने एक अन्तर्राष्ट्रीय तस्करी रैकेट का पर्दाफाश किया है. यह एक संगठित तस्करी गिरोह था, जो सेकेंड हैंड लग्जरी कारों के जरिए सोना, ड्रग्स और करेंसी की तस्करी करता था. इस संयुक्त कार्रवाई को नाम दिया गया ‘ऑपरेशन नुमखोर’, जिसका मतलब भूटान की जोंगखा भाषा में ‘वाहन’ होता है. इस ऑपरेशन को सीमा शुल्क अधिकारियों ने एटीएस, परिवहन आयुक्तालय और राज्य पुलिस की मदद से अंजाम दिया.
कोचीन में मौजूद सीमा शुल्क (निवारक) आयुक्तालय के हवाले से जारी एक प्रेस नोट के मुताबिक, जांच एजेंसियों को खुफिया सूचना मिली थी कि भारत-भूटान सीमा के रास्ते महंगी कारों की तस्करी हो रही है. दरअसल, भारत में सेकेंड हैंड कारों का आयात प्रतिबंधित है, जब तक कि उन्हें अधिकृत सीमा शुल्क पोर्ट से 160% ड्यूटी चुकाकर न लाया जाए. लेकिन तस्कर इस नियम को दरकिनार कर जाली दस्तावेज़ों और फर्जी मुहरों के सहारे वाहनों को देश में धड़ल्ले से ला रहे थे.
इन कारों को भारत में लाने के लिए तस्करों का रैकेट तीन तरीके अपनाता था-
खास बात ये है कि इस पूरे नेटवर्क को कोयंबटूर से संचालित किया जा रहा था. जांच में सामने आया कि ये तस्करी सिर्फ कारों तक सीमित नहीं थी. कई मामलों में इन वाहनों का इस्तेमाल सोने और मादक पदार्थों की स्मगलिंग के लिए भी किया गया. इतना ही नहीं, भारतीय और विदेशी मुद्रा को भी बड़े पैमाने पर भूटान भेजा जाता था. इस तरह यह गैंग मल्टी-लेयर्ड क्रॉस-बॉर्डर स्मगलिंग सिंडिकेट बन चुका था.
इस गिरोह की जड़ें बहुत गहरी थीं. कोयंबटूर का यह नेटवर्क कई हाई-नेटवर्थ इंडिविजुअल्स यानी अमीर कारोबारियों और प्रभावशाली लोगों से जुड़ा हुआ था. ये लोग अनजाने में तस्करी के हिस्से बनते गए, क्योंकि उन्होंने इन अवैध कारों को खरीद लिया. दरअसल, ये कारें उन्हें सस्ती कीमत पर उपलब्ध कराई जाती थीं.
सीमा शुल्क आयुक्त टी. तिजू ने बताया कि कई एजेंसियों से मिले इनपुट्स को जोड़कर इस ऑपरेशन की योजना बनाई गई थी. खुफिया जानकारी से पुष्टि हुई कि कारों के जरिए तस्करी का बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है. इसके बाद ही समन्वित अभियान चलाकर इस गैंग को पकड़ने की रणनीति बनी.

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