
सुबह प्रभार, शाम को बाहर... मायावती को महंगा पड़ेगा अपने गुस्से का 'नया शिकार'?
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उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव तैयारी में जुटी मायावती ने गुरुवार अपने करीबी नेता शमसुद्दीन राईन को सुबह तीन मंडल का प्रभार सौंपा और उसके कुछ घंटे के बाद ही पार्टी से बाहर कर दिया. ऐसे में सवाल उठता है कि मायावती को अपने गुस्सा का खामियाजा तो नहीं भुगतना पड़ेगा?
बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती अपनी अलग राजनीतिक स्टाइल के लिए जानी जाती हैं। यह स्टाइल न सिर्फ़ उनके क़रीबी बल्कि कई बार उनके विरोधियों तक को हैरान करती है. मायावती की इस अलग स्टाइल का शिकार उनकी पार्टी के कई दिग्गज हो चुके हैं और इस फ़ेहरिस्त में नया नाम जुड़ा है शमसुद्दीन राईन का.
बसपा प्रमुख ने 23 अक्तूबर की सुबह ख़ुद राईन को फ़ोन कर उन्हें लखनऊ, कानपुर और प्रयागराज मंडल जैसे अहम क्षेत्रों का प्रभारी बनने की सूचना दी थी. हैरानी की बात यह है कि माया के इस फ़ोन के कुछ घंटे बाद ही राईन की पार्टी से बर्ख़ास्तगी का लेटर जारी कर दिया गया. उन पर अनुशासनहीनता और पार्टी में गुटबाज़ी बढ़ाने का आरोप लगा.
हालांकि, राईन कह रहे हैं कि उन पर यह कार्रवाई महज़ इसलिए हुई क्योंकि वह 'बहनजी' का एक कॉल नहीं उठा सके. लेकिन सवाल उठता है कि जो मायावती राईन को उन्हें मिली नई ज़िम्मेदारी के बारे में बता रही हैं, वही उन्हें कुछ घंटे बाद ही पार्टी से बाहर कैसे कर सकती हैं?
मायावती का फैसला किया हैरान
ग़ौरतलब है कि बसपा में मायावती ने कभी किसी नेता को ऐसी छूट नहीं दी कि वह पार्टी में मायावती के बाद अपने आप को दूसरा या तीसरा क़द्दावर चेहरा बता सके। ऐसे कई चेहरों को मायावती बिना किसी लाग-लपेट के सीधे बाहर का रास्ता दिखा चुकी हैं। इनमें कई नाम तो ऐसे हैं जिन्हें पार्टी संगठन की रीढ़ कहा जाता था.
हालांकि, मायावती के इन क़दमों का बसपा को नुक़सान भी हुआ पार्टी 14 साल से यूपी की सत्ता से दूर है और इसकी एक वज़ह एक्सपर्ट मायावती की इसी राजनीतिक शैली को बताते हैं.

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