
'सामना' के लेख से MVA में खलबली, डिप्टी सीएम अजित पवार बोले-ऐसे बयान से बचें राउत
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संजय राउत के लेख पर आपत्ति जताते हुए महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा है कि एनसीपी में कोटा से किसे कौन सा पद मिलेगा, ये शरद पवार तय करते हैं. किसी दूसरे को इस पर सवाल करने का कोई अधिकार नहीं है.
शिवसेना के मुखपत्र सामना में छपे संपादकीय के बाद महाराष्ट्र सरकार के गठबंधन में भूचाल आ गया है. सामना में ये सम्पादकीय शिवसेना सांसद संजय राउत ने लिखा है, जिसमें उन्होंने महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि मुंबई पुलिस आयुक्तालय में बैठकर सचिन वाजे वसूली करता रहा और गृहमंत्री को इस बारे में जानकारी नहीं होगी? इसके अलावा संजय राउत ने लिखा 'अनिल देशमुख को गृहमंत्री का पद दुर्घटनावश मिल गया. जयंत पाटिल, दिलीप वलसे पाटिल ने गृहमंत्री का पद स्वीकार करने से मना कर दिया था, तब ये पद शरद पवार ने अनिल देशमुख को सौंपा था. इस पद की एक गरिमा और रुतबा है.'
कोर्ट ने पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली बनाने पर जोर दिया ताकि बिना नसबंदी वाले कुत्तों की रिपोर्टिंग हो सके. 28 जनवरी को सरकारों की ओर से सॉलिसिटर जनरल अपनी दलीलें प्रस्तुत करेंगे. कोर्ट ने एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट के पॉडकास्ट पर नाराजगी जताई और मामले की गंभीरता को रेखांकित किया. ये सुनवाई आवारा कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता को जाति के आधार पर अपमानित करने की स्पष्ट मंशा होनी चाहिए। पटना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एफआईआर और आरोप पत्र में जाति-आधारित अपमान के अभाव को रेखांकित किया। कोर्ट ने एससी एसटी एक्ट की धारा 3(1) के प्रावधानों को दोहराते हुए कहा कि केवल अपशब्दों का प्रयोग अपराध नहीं बनता।

भारतीय जनता पार्टी ने नितिन नबीन को अपना 12वां राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है. सोमवार को चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंच पर उन्हें निर्वाचन पत्र सौंपा गया. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह समेत पार्टी के प्रमुख नेता मौजूद थे. पीएम मोदी ने नितिन नबीन को बधाई देते हुए कहा कि वे उनके बॉस हैं और अब वे सभी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. देखें PM मोदी के संबोधन की बड़ी बातें.

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार का आधा टर्म नवंबर 2025 में पूरा हो चुका है, जिससे स्पेकुलेशन बढ़ा. होम मिनिस्टर जी परमेश्वर भी फ्रे में हैं, लेकिन मुख्य जंग सिद्धारमैया-डीके के बीच है. पार्टी वर्कर्स में कन्फ्यूजन है, लेकिन हाई कमांड का फोकस यूनिटी पर है. क्या 29 जनवरी का समन टसल खत्म करेगा या नया ड्रामा शुरू होगा? देखना बाकी है.









