
'सम्मान सहित कराएं स्नान...' शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती की प्रशासन को दो टूक, बोले- प्रजा की रक्षा करना ही राजधर्म
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त्रिवेणी स्नान को लेकर चल रहे विवाद के बीच जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने पुलिस और प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि ब्रह्मचारियों की शिखा और सूत्र का अपमान अस्वीकार्य है और प्रशासन तुरंत माफी मांगे. स्वामी ने याद दिलाया कि राजा का पहला कर्तव्य प्रजा और धर्म की रक्षा करना होता है.
प्रयागराज में संगम त्रिवेणी स्नान को लेकर चल रहे विवाद पर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने नाराजगी जाहिर की है. उनका कहना है कि प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली इस पूरे मामले में ठीक नहीं हैं. उन्होंने कहा कि पुलिस ने ब्रह्मचारियों और सनातन परंपराओं का अपमान किया है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता.
शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि जो हुआ है, हम उसकी घोर निंदा करते हैं. राजा का कर्तव्य है प्रजा की रक्षा करना, प्रजा क्या चाहती है. ये भारत देश है, यहां धर्म ही प्रधान है. हम सब हिंदू धर्मावलंबी हैं. सनातन धर्मावलंबी हैं. धर्म का पालन करने वाले लोग हैं. हमारे धर्म में गंगा स्नान है. नर्मदा स्नान है. तुलसी पूजन है. वटवृक्ष पूजन है. मूर्ति पूजन है. देवताओं का पूजन है. कोई कैसे रोक सकता है?
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उन्होंने कहा कि स्नान करने के लिए ज्योतिष पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य जी जा रहे थे, उनके साथ सौ दो सौ लोग उनके भक्त थे. बटक ब्रह्मचारी भी थे, विद्यार्थी भी थे. तो हिंदू धर्म की पहचान क्या है? सिखा और सूत्र ही पहचान है. छोटे-छोटे विद्यार्थियों की शिखा पकड़कर चोटी पकड़-पकड़ करके घसीटा गया. जो काम विधर्मियों ने नहीं किया, वो वहां के प्रशासन यानी पुलिस प्रशासन ने किया, जो बिल्कुल अनुचित था. उसे उचित नहीं ठहराया जा सकता. प्रशासन को क्षमा मांगना चाहिए और शंकराचार्य जी को ले जाकर के त्रिवेणी में सम्मानपूर्वक स्नान कराना चाहिए.
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उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए ही आज से ढाई हजार साल पहले शंकराचार्य जी का अवतार हुआ. जब हमारे देश में विधर्मियों ने आक्रमण किया. बौद्धिक आक्रमण किया. उन्होंने कहा कि वेद: अप्रमाणम. वेद प्रमाण नहीं हैं. तब भगवान शंकराचार्य जी का अवतार हुआ. उन्होंने कहा कि वेद ही प्रमाण हैं. सनातन धर्म की रक्षा के लिए ही उनका अवतार हुआ और अपनी बत्तीस वर्ष की आयु में उन्होंने उस हिंदू धर्म सनातन धर्म की स्थापना की, चार मठों की स्थापना की.

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