Primary Country (Mandatory)

Other Country (Optional)

Set News Language for United States

Primary Language (Mandatory)
Other Language[s] (Optional)
No other language available

Set News Language for World

Primary Language (Mandatory)
Other Language(s) (Optional)

Set News Source for United States

Primary Source (Mandatory)
Other Source[s] (Optional)

Set News Source for World

Primary Source (Mandatory)
Other Source(s) (Optional)
  • Countries
    • India
    • United States
    • Qatar
    • Germany
    • China
    • Canada
    • World
  • Categories
    • National
    • International
    • Business
    • Entertainment
    • Sports
    • Special
    • All Categories
  • Available Languages for United States
    • English
  • All Languages
    • English
    • Hindi
    • Arabic
    • German
    • Chinese
    • French
  • Sources
    • India
      • AajTak
      • NDTV India
      • The Hindu
      • India Today
      • Zee News
      • NDTV
      • BBC
      • The Wire
      • News18
      • News 24
      • The Quint
      • ABP News
      • Zee News
      • News 24
    • United States
      • CNN
      • Fox News
      • Al Jazeera
      • CBSN
      • NY Post
      • Voice of America
      • The New York Times
      • HuffPost
      • ABC News
      • Newsy
    • Qatar
      • Al Jazeera
      • Al Arab
      • The Peninsula
      • Gulf Times
      • Al Sharq
      • Qatar Tribune
      • Al Raya
      • Lusail
    • Germany
      • DW
      • ZDF
      • ProSieben
      • RTL
      • n-tv
      • Die Welt
      • Süddeutsche Zeitung
      • Frankfurter Rundschau
    • China
      • China Daily
      • BBC
      • The New York Times
      • Voice of America
      • Beijing Daily
      • The Epoch Times
      • Ta Kung Pao
      • Xinmin Evening News
    • Canada
      • CBC
      • Radio-Canada
      • CTV
      • TVA Nouvelles
      • Le Journal de Montréal
      • Global News
      • BNN Bloomberg
      • Métro
संघ के 100 साल: जब हेडगेवार ने दे दिया था सरसंघचालक पद से इस्तीफा, फिर हुआ था ‘भरत मिलाप’!

संघ के 100 साल: जब हेडगेवार ने दे दिया था सरसंघचालक पद से इस्तीफा, फिर हुआ था ‘भरत मिलाप’!

AajTak
Wednesday, October 08, 2025 05:00:37 AM UTC

संघ के सदस्य आज भी आपदा में तो गणवेश पहनकर कार्य करते हुए दिखते हैं लेकिन आंदोलनों में नहीं. इसके पीछे 1930 में हुए आंदोलन की एक कहानी है. इस आंदोलन में शिरकत करने के लिए डॉ हेडगेवार ने सरसंघचालक पद से इस्तीफा दिया था. संघ के 100 साल के 100 कहानियों में इस बार कहानी उस घटना की जब डॉ हेडगेवार को सरसंघचालक पद से इस्तीफा देना पड़ा था.

जिस संगठन को अपने दम पर खड़ा किया हो, तमाम बाधाएं पार कर, गृहस्थ जीवन का त्याग कर जिसे जन-जन तक पहुंचाया हो, लोगों में इतना विश्वास जगाया हो कि वो अपनी संतान तक संगठन को देने को तैयार हुए, उसी संगठन यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक पद से डॉ केशव बलिराम हेडगेवार ने त्यागपत्र दे दिया था. सवाल है कि आखिर ऐसी नौबत आई क्यों? इस सवाल के जवाब में उन बड़े सवालों के जवाब भी मिल जाते हैं, जो आज भी संघ की ओर उछाले जाते हैं जैसे संघ ने स्वतंत्रता की लड़ाई में क्या किया? संघ ने कांग्रेस या गांधीजी के किसी आंदोलन को समर्थन क्यों नहीं दिया?   डॉ हेडगेवार अनुशीलन समिति के साथ मिलकर पूरी तरह क्रांतिकारी गतिविधियों में उतरने जा रहे थे. लेकिन बाद में अपने आप को उन्होंने सीमित कर लिया. इसके पीछे उनकी सोच थी कि ये लड़ाई जेल या फांसी पर खत्म नहीं होनी चाहिए क्योंकि ये लम्बी लड़ाई है. लड़ाई देश को उसका खोया हुआ वैभव वापस दिलाने की और आजादी उसका पहला पड़ाव है. ऐसे में कांग्रेस में इतना आगे तक बढ़ जाने के बावजूद खिलाफत आंदोलन, मोपला दंगा जैसे मुद्दों पर उनके मतभेद बढ़े तो वो अपना संगठन शुरू करने में जुट गए.   कांग्रेस और संघ में एक बड़ा फर्क था. कांग्रेस को कई बड़े अंग्रेजों ने शुरू करवाया था. दूसरे अधिवेशन में तो डिनर ही गवर्नर जनरल ने दिया था. कई अध्यक्ष ही अंग्रेज रहे थे और सालों तक कांग्रेस साल में एक बार मिलने वाला संगठन ही रहा, यानी 28-30 संगठनों का एक मंच जिसमें पहले दिन से ही दिग्गज नेताओं की फौज थी. जबकि संघ में कई साल बाद तक डॉ हेडगेवार जैसा दूसरा बड़ा नेता नहीं जुड़ा.   जब गांधीजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन के तहत दांडी मार्च का ऐलान किया तो उनके साथी ही हैरान थे. हैरान डॉ हेडगेवार भी थे लेकिन उनकी वजह दूसरी थी. दरअसल संघ के तमाम स्वयंसेवक अखबारों में आई गांधीजी के आंदोलन की खबरों से बैचेन हो रहे थे. डॉ हेडगेवार ने उन दिनों सभी शाखाओं में एक सर्कुलर भेजा, जिसका सार था कि आंदोलनों में कोई भी स्वयंसेवक वैयक्तिक तौर पर हिस्सा लेने के लिए स्वतंत्र है. संघ का मानना है कि देश में आजादी या सामाजिक लड़ाई के लिए लड़ रहे आंदोलनों को संघ का वैचारिक समर्थन रहेगा. लेकिन संघ किसी आंदोलन में हिस्सा नहीं लेगा. अगर आप आज भी गौर करेंगे तो पाएंगे कि संघ आज भी अपने नाम से किसी आंदोलन में हिस्सा नहीं लेता. हां उसके स्वयंसेवक उन आंदोलनों का हिस्सा हो सकते हैं जैसे राम जन्मभूमि से लेकर अन्ना आंदोलन तक में संघ का समर्थन माना जाता रहा है. ऐसे में उस सर्कुलर में लिखा था कि जो स्वयंसेवक गांधीजी के आंदोलन में हिस्सा लेना चाहे वो सरसंघचालक से अनुमति लेकर जा सकता है.   दिलचस्प बात ये भी है कि गांधीजी ने जब दांडी मार्च का ऐलान किया तब खुद नेहरू पिता-पुत्र इस फैसले से सहमत नहीं थे. राजमोहन गांधी ने अपनी किताब ‘Mohan Das, A True Story of a man, his people and an Empire’ में लिखा है, ‘On 5 March, from the Ashram Prayer Ground, Gandhi made the first public announcement about the choice of salt. His Political colleagues were shocked, Neither Jawahar Lal Nehru nor his father was impressed’. गांधीजी जनता की नब्ज समझते थे, वो जनता को जोड़ना जानते थे, इसलिए शुरूआत में वो जिस किसी कार्यक्रम का भी ऐलान करते थे, सभी को अजीब लगता था कि नमक बनाने से आजादी कैसे मिलेगी. बाद में दांडी मार्च का जो असर देश भर में और देसी विदेशी मीडिया में दिखा तो नेहरू को लगा भी कि वो गलत थे. खुद नेहरू ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि, ‘’I felt a little abashed and ashamed for having questioned the efficacy of this method when it was proposed first by Gandhiji.’’

  इधर डॉ हेडगेवार ने सैकड़ों स्वयंसेवकों को इस आंदोलन में हिस्सा लेने की अनुमति दी. हालांकि उन दिनों ओटीसी शिविर चल रहे थे, सो कइयों को उनके पूरा होने तक रोका गया. एक दिलचस्प सवाल वो जरूर पूछते थे कि “दो साल इस आंदोलन में जेल जाने के लिए तैयार हो, इतना ही समय संघ को दे दो तो वो कितनी तेजी से बढ़ जाएगा, कभी सोचा है?” इधर अप्पा जी जोशी जैसे विदर्भ के इतने बड़े चेहरे ने भी डॉ हेडगेवार से आंदोलन में जाने की अनुमति मांगी तो भी डॉ. हेडगेवार हैरान थे. यूं भी हेडगेवार का लक्ष्य बड़ा था, उन्हें हर समय बस वही दिखाई देता था. उन्हें अप्पाजी के पत्र पर ओटीसी शिविर के बाद बात करने को कहा. अप्पाजी ने ओटीसी के बाद दोबारा पत्र लिखा तो डॉक्टर साहब ने जवाब दिया कि मैं भी आपके साथ इस आंदोलन में भाग लूंगा.  असहमति के बाद नेहरू पिता-पुत्र भी दांडी मार्च के रास्ते में गांधीजी से मिलने आए थे.

लेकिन ड़ॉ हेडगेवार पूरी तरह जेल जाने का मन बना चुके थे. वो इस आंदोलन में रस्मी तौर पर नहीं उतरना चाहते थे. असहयोग आंदोलन में वो पहले भी जेल जा चुके थे. लेकिन 3 महीने बाद दांडी जाकर नमक कानून तोड़ना किसी को जम नहीं रहा था. चर्चा हुईं तो पता चला कि अप्पाजी और उनके दोनों के परिचित और तिलक के अनुयायी माधवराव अणे ने हाल ही में एक जंगल सत्याग्रह का ऐलान किया था.   मध्य प्रांत की सरकार ने 1618 वर्ग मील के जंगल को 1917 में प्रतिबंधित घोषित कर दिया था. ना चारा काटा जा सकता था, ना ही लकड़ी, कई कारोबार, पशुपालन और जंगल पर निर्भर रहने वाले हजारों लोग परेशान हो गए. उसके खिलाफ ये आंदोलन एक तरह से अंग्रेजी सरकार के खिलाफ सविनय अवज्ञा का ही एक रूप था.  गुरुपूर्णिमा के दिन त्यागपत्र और चुने गए नए सरसंघचालक

डॉ हेडगेवार ने ऐलान कर दिया कि वो ‘जंगल सत्याग्रह’ आंदोलन को समर्थन देंगे और उस जंगल में जाकर खुद घास काटेंगे. नागपुर के काम को देखने के लिए उन्होंने बाला साहेब आप्टे और बापूराव भेडी को नियुक्त किया और अपनी गैरमौजूदगी में सरसंघचालक चुने डॉ परांजपे. इस ऐलान के लिए दिन चुना गया 12 जुलाई 1930 का, जिस दिन संघ का गुरु पूर्णिमा उत्सव था. इस मौके पर उन्होंने कहा कि, जैसे ही मैं इस मंच से उतर जाऊंगा, सरसंघचालक नहीं रहूंगा”. डॉ हेडगेवार ने फिर से स्पष्ट किया कि हमारे स्वयंसेवक स्वतंत्रता व सामाजिक मुद्दों पर होने वाले आंदोलनों में हिस्सा लेते रहे हैं और उसी वजह से हम भी गांधीजी के इस आंदोलन में भाग ले रहे हैं.

यहां पढ़ें: RSS के सौ साल से जुड़ी इस विशेष सीरीज की हर कहानी   14 जुलाई को वो कई स्वयंसेवकों और अप्पाजी के साथ वर्धा के लिए रवाना हुए, सैकड़ों स्वयंसेवक छोड़ने गए. तय हुआ कि ड़ॉक्टर हेडगेवार 21 जुलाई को जंगल से जुड़े इस गलत कानून को तोड़ेंगे. जब वो यवतमाल पहुंचे तो तमाम स्वयंसेवक अपने घर तार भेजने लगे कि गणवेश (संघ की यूनीफॉर्म) भिजवा दीजिए. फिर हेडगेवार ने उन्हें रोका और कहा कि इस आंदोलन में संघ भाग नहीं ले रहा है. हम स्वयंसेवक के तौर पर आंदोलन को समर्थन कर रहे हैं, सो गणवेश में नहीं जाएंगे. संघ के स्वयंसेवक आज भी आपदा में तो गणवेश  पहनकर आते हैं, लेकिन आंदोलनों में नहीं.   21 जुलाई 1930 को 10 हजार लोगों की भीड़ मौजूद थी. ये यवतमाल से 10 किमी दूर लोहारा जंगल के एक गांव में जुटे थे. पुलिस ने हेडगेवार और साथियों को चेतावनी दी, लेकिन वो जंगल कटाई में जुटे रहे, भीड़ वंदेमातरम और भारत माता की जय के नारे लगाती रही. आखिर में पुलिस ने जंगल कानून तोड़ने के जुर्म में सभी को गिरफ्तार कर लिया. डॉ हेडगेवार को 9 महीने के सश्रम कारावास और बाकी साथियों को 4 महीने की सजा सुनाई गई.   उनकी गिरफ्तारी के विरोध में भी कई जगह प्रदर्शन हुए, फिर कई अधिकारी और कार्यकर्ता गिरफ्तार हुए और जब तक हेडगेवार बाहर नहीं आ गए, ना जाने कितने संघ स्वयंसेवक जेल पहुंच गए. लेकिन दिलचस्प बात ये है कि सबने गांधीजी के सविनय अवज्ञा आंदोलन से खुद को जोड़ा, पुलिस की फाइलों में संघ का नाम भी नहीं आया. सभी जगह ये सारे आंदोलन, प्रदर्शन कांग्रेस के आंदोलन के तौर पर ही गिने गए. इनमें एक आंदोलन उन दिनों सावरकर की किताबों पर लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में भी था.   रिहाई के बाद ऐसे हुआ भरत मिलाप   14 फरवरी 1930 को डॉ हेडगेवार रिहा हुए. अकोला और वर्धा में उनकी शोभायात्राएं निकाली गईं, जिनमें अनेक कांग्रेसी नेता कार्यकर्ता भी शामिल हुए. नरेन्द्र सहगल अपनी किताब ‘डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम’ में 17 फरवरी 1930 को नागपुर में उनके भव्य स्वागत के बारे में लिखते हैं कि, “नागपुर के हाथीखाना मैदान में एक स्वागत सभा हुई, जिसमें डॉ परांजपे ने सरसंघचालक पद की धरोहर वापस डॉक्टर जी को सौंप दी. ये भावुक दृश्य ऐसा था मानो भगवान राम के वनवास के बाद वापस अयोध्या लौटने पर उनके भ्राता भरत ने श्रीराम की धरोहर ‘खड़ाऊं’ को वापस करके अयोध्या के सिंहासन पर उनको विराजमान कर दिया हो”.

पिछली कहानी: वंदेमातरम की धरती पर डॉ हेडगेवार का सीक्रेट कोड नेम था ‘कोकेन’

Read full story on AajTak
Share this story on:-
More Related News
UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक पर क्या बोले एक्सपर्ट्स? देखें

देश की सर्वोच्च अदालत ने UGC के नए नियमों से सामान्य वर्ग को नफरती करके फंसाए जाने की आशंका को गंभीरता से लिया है. कॉलेज कैंपस में भेदभाव रोकने के नाम पर 13 जनवरी के नियमों को सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है. इसके बाद सामान्य वर्ग की राजनीतिक ताकत और इस मुद्दे के व्यापक मायनों पर चर्चा तेज हो गई है. जातिगत भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए इन नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक ने इसके भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

कांग्रेस से तनातनी के बीच MDMK पर स्टालिन की नजर, गठबंधन की कोशिश में DMK

डीएमके और कांग्रेस में चल रही तनातनी के बीच स्टालिन की पार्टी गठबंधन के लिए डीएमडीके से भी बातचीत कर रही है. डीएमडीके को साथ लाने की कोशिश में एनडीए भी है. इस बीच कनिमोझी ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की है.

सुनेत्रा पवार का डिप्टी सीएम बनना तय... स्वीकार किया प्रस्ताव, मिल सकते हैं ये मंत्रालय

सुनेत्रा पवार की नियुक्ति से महायुति सरकार में एक बार फिर नए समीकरण बनते दिख रहे हैं. बताया जा रहा है कि यह फैसला सरकार के भीतर सत्ता संतुलन और आगामी राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.

'सत्ता की कमान BJP के हाथ में...', सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के सवाल पर बोले नाना पटोले

कांग्रेस नेता नाना पटोले ने सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के सवाल पर प्रतिक्रिया दी है. नागपुर में उन्होंने राज्य सरकार पर हमला करते हुए कहा कि सरकार सोई हुई है और लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. उन्होंने लाडकी बहन योजना और कर्ज माफी को लेकर भी सवाल उठाए.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने CM योगी को किस बात का अल्टीमेटम दिया? देखें

प्रयागराज माघ मेले से लौटे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने सरकार को गोहत्या और मांस निर्यात के मुद्दे पर कड़ी चेतावनी दी है. शंकराचार्य ने साफ कहा है कि अगर सरकार द्वारा निर्धारित शर्तें पूरी नहीं की गईं, तो वे मुख्यमंत्री को नकली हिंदू घोषित करेंगे. यह बयान राजनीतिक और सामाजिक विवादों को जन्म दे सकता है क्योंकि गोहत्या और मांस निर्यात जैसे मुद्दे प्रदेश के भीतर संवेदनशील विषय हैं.

IAS की फैक्ट्री बन रहे इंजीनियरिंग के क्लासरूम... क्या हम हमारे टेक टैलेंट को गंवा रहे हैं?

सिविल सेवा परीक्षा में जो उम्मीदवार चुने जा रहे हैं, उसमें आधे से ज्यादा उम्मीदवार इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से हैं. ऐसे में सवाल है कि क्या इससे इंजीनियरिंग छात्रों पर लग रहे रिसोर्स का सही इस्तेमाल हो पा रहा है?

झारखंड: FJCCI चेयरमैन ने बताया इस बार के बजट से क्या हैं उम्मीदें

झारखंड फेडरेशन ऑफ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (FJCCI) के अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने राज्य के चार ऐसे जिलों की रेल कनेक्टिविटी समेत अन्य आवश्यक मांगों को लेकर यूनियन बजट में शामिल करने की बात कही है जहां आज तक रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं है. आदित्य मल्होत्रा ने इन जिलों के लिए रेल परिवहन के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि यह कदम कैसे क्षेत्रीय विकास में सहायक होगा.

कल आधी रात के बाद दिल्ली में 3 दिन बारिश... पंजाब-हरियाणा-राजस्थान में भी अलर्ट, पहाड़ों पर होगी बर्फबारी

उत्तर भारत में मौसम का मिजाज बदलने वाला है. मौसम विभाग (IMD) के अनुसार आने वाले दिनों में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में फिर बर्फबारी की संभावना है. वहीं, दिल्ली-NCR में 31 जनवरी से 2 फरवरी तक बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है. मौसम विभाग ने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के लिए भी बारिश का अलर्ट जारी किया है.

एवलांच के खतरे के बीच बर्फीले पहाड़ों पर पहरा दे रहे हिमवीर, देखें ग्राउंड रिपोर्ट

जम्मू कश्मीर से हिमाचल प्रदेश तक पहाड़ों पर लगातार भारी बर्फबारी जारी है. इस बर्फबारी के कारण खूबसूरत नजारे देखने को मिल रहे हैं, जिससे बड़ी तादाद में पर्यटक इन इलाकों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं. मौसम के इस बदलाव ने कई रास्ते बंद कर दिए हैं जिससे कई जगहों पर यातायात जाम की स्थिति बनी है. श्रीनगर समेत पुलवामा, कुलगाम, शोपिया, गुरेज और अन्य क्षेत्रों में तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है.

असम के सात जिलों में 64 लाख घुसपैठियों का दावा, अमित शाह बोले- कांग्रेस शासन में राज्य की डेमोग्राफी बदली

असम में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां प्रदेश में तेज हो गई हैं. अपने दो दिवसीय दौरे पर अमित शाह ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस के 20 साल से ज्यादा शासन के दौरान सात जिलों में 64 लाख से ज्यादा घुसपैठियों की एंट्री हो गई.

अमेरिकी हमले के डर से ईरान छिपा रहा है अपना 'न्यूक्लियर गोल्ड'

मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है. अमेरिका ने USS Abraham Lincoln कैरियर ग्रुप अरब सागर में तैनात कर ईरान पर हमले की धमकी दी है. ईरान डर से अपने न्यूक्लियर साइट्सको गहराई में छिपा रहा है. टनल सील कर रहा है. ड्रोन कैरियर शहीद बघेरी को बंदर अब्बास से 6 किमी दूर रखा है. IRGC 1-2 फरवरी को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लाइव-फायर एक्सरसाइज करेगा.

कमांडो काजल को पति के काले कारनामों की लग गई थी भनक! क्या इसलिए अंकुर ने डंबल से कर दी हत्या

दिल्ली पुलिस की महिला कमांडो काजल की हत्या के मामले अब नई परतें खुल रही हैं. उसके परिजनों ने पति अंकुर पर हत्या के साथ-साथ पेपर लीक रैकेट का मास्टरमाइंड होने के गंभीर आरोप लगाए हैं. दावा है कि काजल के पास उसके काले कारनामों के राज़ थे. हत्या से पहले वीडियो कॉल और डंबल से हत्या के आरोपों ने मामले को और सनसनीखेज बना दिया है.

भतीजे ने पकड़े पैर, सीने पर बैठी पत्नी और काट दिया गला... अवैध संबंध के चलते यूं हुआ बलराम का मर्डर, दहला देगी कहानी

शाहजहांपुर में नाजायज़ रिश्ते के चलते पत्नी ने अपने भतीजे के साथ मिलकर पति की बेरहमी से हत्या कर दी. इस वारदात को दोनों ने मिलकर अंजाम दिया. पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. कत्ल की ये वारदात चर्चा का विषय बनी है. पढ़ें पूरी कहानी.

तारीख से टारगेट तक... ईरान पर हमले का अमेरिकी प्लान तैयार! देखें 10 तक

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव पर दुनियाभर की निगाहें टिकी हुई हैं. ईरान के करीब अमेरिकी युद्धपोत और लड़ाकू विमानों की तैनाती हो चुकी हैं. डिफेंस एक्सपर्ट अमेरिकी सेना की तैनाती को ईरान पर सैन्य एक्शन से जोड़कर देख रहे हैं. ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर अमेरिका की ब्रिटेन, फ्रांस, इजरायल और मिडिल ईस्ट के चार मुल्कों के साथ बातचीत हो चुकी हैं. दावा किया जा रहा है कि, आज की रात ईरान पर बहुत भारी है. देखें 10 तक.

साध्वी प्रेम बाईसा की मौत की मिस्ट्री किन सवालों में उलझी?

राजस्थान के जोधपुर में 25 वर्षीय कथावाचक प्रेम बाईसा की मौत की खबर ने सभी को दहलाकर रख दिया है. 28 जनवरी को हुई उनकी मौत को लेकर समर्थकों में गहरा आक्रोश है. वे इसे सामान्य मौत नहीं बल्कि हत्या मानते हैं और इसके लिए उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं.

मिडिल ईस्ट में छिड़ने वाला है महायुद्ध? ट्रंप की धमकियों के बीच अब पलटवार को तैयार ईरान

ईरान के करीब अमेरिकी युद्धपोत और लड़ाकू विमानों की तैनाती हो चुकी हैं. डिफेंस एक्सपर्ट अमेरिकी सेना की तैनाती को ईरान पर सैन्य एक्शन से जोड़कर देख रहे हैं. वहीं ईरान ने भी जमीन, हवा और समुद्र... तीनों मोर्चों पर जवाबी कार्रवाई की व्यापक रणनीति तैयार कर ली है.

सुनेत्रा पवार संभालेंगी डिप्टी CM का पद, राज्यसभा जाने की तैयारी में अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ

वर्तमान में सुनेत्रा राज्यसभा की सांसद हैं. महाराष्ट्र सरकार में शामिल होने के बाद उन्हें राज्यसभा सीट खाली करनी पड़ेगी. सूत्रों की मानें तो अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ को उनकी मां की जगह राज्यसभा भेजने की तैयारी है.

गणतंत्र दिवस के दौरान 'अदृश्य शक्तियों' के पहरे में था राजधानी दिल्ली का आसमान

77वें गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान दिल्ली-NCR की हवाई सुरक्षा पूरी तरह हाई अलर्ट पर रही. भारतीय वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस ग्रिड ने परेड से लेकर बीटिंग रिट्रीट तक हर गतिविधि पर नजर रखी. सेना, नौसेना, दिल्ली पुलिस, SPG और NSG समेत कई एजेंसियों के समन्वय से राजधानी के आसमान को सुरक्षित रखा गया.

क्या अमेरिका के बगैर ही तय हो रहा न्यू वर्ल्ड ऑर्डर? देखें ब्लैक & व्हाइट

NATO बिना अमेरिका के युद्धाभ्यास कर रहा है. यानी अब वर्ल्ड ऑर्डर बिना अमेरिका के तय हो रहा है और इसे बर्दाश्त करना उसके लिए मुश्किल हो रहा है. इसलिए अमेरिका अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए किसी को टैरिफ की धमकी दे रहा है, किसी को युद्ध की धमकी दे रहा है.अब अमेरिका ने ईरान पर हमला ना करने के बदले अपनी कई शर्तें मानने की चेतावनी दी है. ऐसे में सवाल है क्या अमेरिका अपने वर्चस्व को बरकरार रखने के लिए कोई बड़ा कदम उठा सकता है? देखें ब्लैक एंड व्हाइट.

माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ पुलिस कार्रवाई पर सवाल, सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल

प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ कथित पुलिस दुर्व्यवहार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है. याचिका में धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान संतों और धर्माचार्यों के लिए एक तय SOP बनाने की मांग की गई है.

छत्तीसगढ़ के सुकमा में 5 लाख के इनामी समेत 4 नक्सलियों ने किया सरेंडर, हथियार डालने वालों में 2 महिला नक्सली भी

सुकमा में किस्टाराम एरिया कमेटी के चार नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है. इनमें पांच लाख के इनामी नक्सली के साथ ही दो महिला कैडर भी शामिल हैं.

T20 वर्ल्ड कप में एक ही टीम में खेलेंगे भारत-पाक‍िस्तान के ख‍िलाड़ी, श्रीलंका के इंटरनेशनल प्लेयर की भी एंट्री

T20 WC 2026 USA Team:टी20 वर्ल्ड कप में अमेरिका की टीम का ऐलान हो चुका है, लेकिन यह टीम अमेरिका की कम और भारतीय उपमहाद्वीप की टीम ज्यादा लग रही है. इस टीम में 9 भारतीय मूल के, 3 पाकिस्तानी मूल के और 1 श्रीलंका के मूल का ख‍िलाड़ी है.

अविमुक्तेश्वरानंद ने CM योगी से क्यों मांगा अपने हिंदू होने का 'सबूत'? देखें खबरदार

उत्तर प्रदेश में जहां गोतस्कर से लेकर गौकशी करने वालों का एनकाउंटर पुलिस कर रही है, वहीं पर प्रयागराज के विवाद के बाद से नाराज चल रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अब सीधे मुख्यमंत्री को चालीस दिन का चैलेंज गाय के मुद्दे पर दे रहे हैं. देखें खबरदार.

'मेरी लेडी लव जैकलिन का सपना था...', RCB को खरीदना चाहता है महाठग सुकेश, दिया ₹8300 करोड़ का ऑफर

कुख्यात ठग सुकेश चंद्रशेखर ने आईपीएल फ्रेंचाइजी रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) को खरीदने की पेशकश की है. उसने आरसीबी की प्रमोटर कंपनी डायजियो (Diageo) को पत्र लिखकर LS Holdings के जरिए 8300 करोड़ रुपये की ऑल-कैश डील का प्रस्ताव दिया है.

'गुंडागर्दी कर रहे, सामान कैसे छुआ...', Akasa Air की गोवा-दिल्ली फ्लाइट में दो यात्रियों का हंगामा, उतारे गए

गोवा से दिल्ली जा रही अकासा एयर की फ्लाइट QP1358 में केबिन क्रू से बदसलूकी करने पर दो यात्रियों को विमान से उतार दिया गया. ओवरहेड कम्पार्टमेंट में सामान रखने के दौरान शुरू हुआ विवाद केबिन क्रू से गाली-गलौज व धक्का-मुक्की तक पहुंच गया.

© 2008 - 2026 Webjosh  |  News Archive  |  Privacy Policy  |  Contact Us