
शेख हसीना के जाते ही बांग्लादेश ने उठाए दो बड़े कदम, सही साबित हुई भारत की आशंका?
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बांग्लादेश की केयरटेकर सरकार ने हाल ही में कुछ ऐसे फैसले किए हैं जिन्हें भारत की चिंता बढ़ाने वाला बताया जा रहा है. सबसे पहले बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने अल-कायदा से जुड़े आतंकवादी संगठन अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) के प्रमुख जशीमुद्दीन रहमानी को रिहा किया. रहमानी की रिहाई भारत के लिए चिंता की बात है क्योंकि रहमानी भारत में स्लीपर सेल की मदद से जिहादी गतिविधियां फैलाता रहा है. इसके अलावा, बांग्लादेश ने देश की सबसे बड़ी इस्लामिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी से भी लगा बैन हटा दिया है. ये पार्टी भी अपने भारत विरोधी रुख के लिए जानी जाती रही है.
बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सत्ता गिरने के बाद नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. मोहम्मद यूनुस फिलहाल वहां की केयरटेकर सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं. जबसे उन्होंने बांग्लादेश की कमान संभाली है, तब से एक के बाद एक कट्टरपंथी संगठनों पर लगे बैन हट रहे हैं और सजायाफ्ता आतंकी जेल से रिहा हो रहे हैं. पड़ोसी देश में ये हालात भारत के लिए बेहद चिंता की बात है.
मोहम्मद युनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने बुधवार को देश की मुख्य इस्लामिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी और उसके गुटों पर से प्रतिबंध हटाया. इससे ठीक दो दिन पहले 26 अगस्त, सोमवार को उसने अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) के प्रमुख जशीमुद्दीन रहमानी को भी पैरोल पर रिहा कर दिया जिसके तार आतंकवादी संगठन अल-कायदा से जुड़े हैं. एबीटी भारत में आतंक फैलाने की नाकाम साजिशें रचता रहा है.
ब्लॉगर की हत्या के आरोप में सजा काट रहा था रहमानी
एक ब्लॉगर की हत्या के दोषी जशीमुद्दीन रहमानी पर बांग्लादेश के आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत आरोप लगे थे. 15 फरवरी 2013 को राजीब हैदर की हत्या के लिए उसे पांच साल जेल की सजा सुनाई गई थी. हैदर की ढाका में उसके घर के सामने हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद रहमानी को अगस्त 2013 में गिरफ्तार किया गया था.
शेख हसीना के शासन के दौरान 2015 में रहमानी के एबीटी को बांग्लादेश में प्रतिबंधित कर दिया गया था. बाद में इसने खुद को अंसार अल-इस्लाम के रूप में दोबारा स्थापित किया जिसे 2017 में फिर से प्रतिबंधित कर दिया गया.
आतंकियों की रिहाई ने भारत की टेंशन बढ़ाई

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