
शुभेंदु अधिकारी से येदियुरप्पा तक... शशि थरूर ने दी लिस्ट- BJP में आते ही बंद हो गई इन 8 नेताओं की जांच
AajTak
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने ऐसे आठ नेताओं की लिस्ट शेयर की है, जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप थे. लेकिन बीजेपी या बीजेपी की सहयोगी पार्टियों में आते ही इनके खिलाफ जांच बंद कर दी गई.
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ शराब घोटाले मामले में चल रही जांच के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने बीजेपी सरकार पर तंज कसा है. उन्होंने ऐसे नेताओं की सूची शेयर की है, जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप थे लेकिन बीजेपी में शामिल हो जाने के बाद उनके खिलाफ जांच बंद कर दी गई.
थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'ना खाऊंगा ना खाने दूंगा' नारे पर भी चुटकी लेते हुए कहा कि शायद वह (मोदी) बीफ के बारे में बात कर रहे थे. थररू की यह टिप्पणी शराब घोटाले मामले में दिल्ली के डिप्टी सीएम रहे मनीष सिसोदिया को सीबीआई की पांच दिनों की कस्टडी में भेजे जाने के बाद आई है.
शशि थरूर ने मंगलवार को आठ नेताओं की लिस्ट सोशल मीडिया पर जारी की. इनमें असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा, शुभेंदु अधिकारी, भावना गवली, यशवंत जाधव, यामिनी जाधव, प्रताप सरनाईक और नारायण राणे हैं. इन सभी पर भ्रष्टाचार के आरोप थे लेकिन बीजेपी या इनके सहयोगी दलों में शामिल होने पर इनके खिलाफ जांच रोक दी गई.
थरूर ने इस लिस्ट का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर शेयर कर दावा किया कि इन नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच बीजेपी में जाने के बाद रोक दी गई.
थरूर ने नरेंद्र मोदी के भ्रष्टाचार विरोधी नारेबाजी का हवाला देते हुए कहा कि मैं हमेशा उनके ना खाऊंगा ना खाने दूंगा के बारे में सोचता हूं. मुझे लगता है कि वह बीफ की बात कर रहे हैं.
बता दें कि मनीष सिसोदिया को सीबीआई ने दिल्ली की शराब नीति घोटाला मामले में गिरफ्तार किया है. इस गिरफ्तारी के बाद सोमवार को उन्हें राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया. जिसके बाद अदालत ने उन्हें पांच दिन (4 मार्च तक) की सीबीआई रिमांड में भेज दिया था. वहीं, सत्येंद्र जैन को 30 मई को गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल वह तिहाड़ जेल में बंद हैं.

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आमने सामने हैं. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सीधे सीधे योगी आदित्यनाथ को चुनौती दे रहे हैं तो प्रशासन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से पूछ रहा है कि बताएं वो शंकराचार्य कैसे हैं. लेकिन बात अब इससे भी आगे बढ़ गई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरोधी उन्हें स्वयंभू शंकराचार्य बता रेह हैं.

227 सदस्यीय BMC में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत होती है. महायुति ने 118 वार्ड जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. इसके बावजूद मेयर पद को लेकर सहमति नहीं बन पाई है. स्थिति तब और नाटकीय हो गई, जब शिंदे ने कथित खरीद-फरोख्त की आशंका के चलते नवनिर्वाचित 29 शिवसेना पार्षदों को सप्ताहांत में एक फाइव-स्टार होटल में ठहरा दिया.

नोएडा केवल उत्तर प्रदेश का शो विंडो नहीं है, बल्कि प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति कंज्यूमर शॉपिंग, प्रति व्यक्ति इनकम टैक्स, प्रति व्यक्ति जीएसटी वसूली आदि में यह शहर देश के चुनिंदा टॉप शहरों में से एक है. पर एक शहरी की जिंदगी की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है. बल्कि जब उसकी जान जा रही हो तो सड़क के किनारे मूकदर्शक बना देखता रहता है.

उत्तर प्रदेश की सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहे विवाद में नई उर्जा आई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुली चुनौती के साथ योगी आदित्यनाथ को उनके शंकराचार्य होने पर सवाल उठाए हैं. इस मुद्दे ने राजनीति में तेजी से हलचल मचा दी है जहां विपक्ष शंकराचार्य के समर्थन में खड़ा है जबकि भाजपा चुप्पी साधे हुए है. दूसरी ओर, शंकराचार्य के विरोधी भी सक्रिय हुए हैं और वे दावा कर रहे हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ही सच्चे स्वयंभू शंकराचार्य हैं.

उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. जहां खुद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर सरकार पर तल्ख हैं, तो वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.







