
शासन-प्रशासन-कोर्ट के बाद अब यूपी के एडहॉक शिक्षकों ने रामलला के दरबार में लगाई अर्जी, ये है मांग
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अपनी समस्याओं को लेकर तदर्थ शिक्षक अधिकारियों से नाराज हैं. उनका कहना है कि वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सही वस्तुस्थिति से अवगत नहीं कर रहे हैं और लगातार गुमराह कर रहे हैं जिसके कारण उनकी समस्याएं जारी हैं.
अधिकारियों से लेकर शासन और फिर कोर्ट का चक्कर लगा रहे यूपी के अलग-अलग माध्यमिक विद्यालयों के तदर्थ अध्यापकों ने अब रामलला के दरबार में अपनी अर्जी लगाई है. इन सभी का कहना है कि हम रामलला को लाए हैं तो रामलला हमको भी लाएंगे. अपनी इसी फरियाद को लेकर सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के सैकड़ो अध्यापक श्री राम जन्मभूमि मंदिर पहुंचे. उन्होंने कहा कि हमने दर्शन के साथ अपनी अर्जी रामलला के दरबार में लगा दी है. अब उम्र के इस पड़ाव पर हमारे पास और कोई रास्ता नहीं है.
अपनी समस्याओं को लेकर तदर्थ शिक्षक अधिकारियों से नाराज दिखाई देते हैं. उनका कहना है कि अफसर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सही वस्तुस्थिति से अवगत नहीं कर रहे हैं और लगातार गुमराह कर रहे हैं जिसके कारण उनकी समस्याएं जारी हैं. तदर्थ शिक्षक कुलदीप सिंह ने कहा कि अधिकारी गुमराह कर रहे हैं. ऐसी कौन सी भूल है जिसकी हमें सजा मिल रही है. अब इस उम्र में हम कहां जाएं. यह अर्थ का युग है लेकिन राम राज्य अगर स्थापित हो रहा है तो जो शिक्षक राष्ट्र का निर्माण करता है, वो क्यों भूखा मरे. हम लोग कहां कहां जाएं इसी क्रम में पहले अर्जी रामलला सरकार में लगाए हैं और जब तक हमारी सेवा बहाली नहीं होती है. हम गोरखपुर धाम और फिर काशी विश्वनाथ में अर्जी लगाते रहेंगे. हमें विश्वास है कि हमारी सेवा वापस आएगी मुख्यमंत्री जी पर भी हमें पूरा-पूरा विश्वास है.
क्या है पूरा मामला यह पूरा मामला 7 अगस्त 1993 से 30 दिसंबर 2000 तक नियुक्त तदर्थ शिक्षकों का है. इन शिक्षकों को 9 नवंबर 2023 को बाहर कर दिया गया था. इसके खिलाफ दायर याचिका में हाईकोर्ट ने इन लोगों की सेवा समाप्ति पर रोक लगा दी थी और इनकी बहाली को लेकर गेंद उत्तर प्रदेश शासन के पाले में डाल दी थी. इसके बाद सन 2000 के बाद नियुक्त शिक्षकों को टीजीटी और पीजीटी में बैठने का मौका मिला लेकिन सन 2000 के पहले नियुक्त शिक्षकों के हाथ खाली रहे. इन शिक्षकों का दर्द यही है कि उन्हें बिना मौका दिए बाहर कर देना कितना उचित है और अब इस उम्र में वह कहां जाएं. कौन सी नौकरी करें और उनके परिवार कैसे चलें. यही वह मांग है जिसको लेकर उन्होंने अब रामलला सरकार के दरबार में अपनी अर्जी लगाई है और उन्हें यकीन है कि जिस तरह वह सबकी सुनते हैं उसी तरह वह उनकी भी सुनेंगे .
भगवान ही बुद्धि पलटेंगे... तदर्थ शिक्षक रविंद्र सिंह ने कहा कि हमने अपनी रामलला सरकार से अर्जी लगाई है कि वह मुख्यमंत्री जी को निर्देशित करें कि जल्दी से जल्दी हमारी पीड़ा समाप्त हो. क्योंकि कहीं ना कहीं यह सरकार चाहती है लेकिन अधिकारी गुमराह कर देते हैं. अब निर्णय लेने का समय आ गया है. अब सरकार इस पर जल्दी निर्णय ले ले और हमारी पीड़ा समाप्त कर दें. अध्यापक के पास केवल उसका सम्मान होता है. उसकी प्रतिष्ठा उसके शिष्यों में होती है, अब वह सब कुछ दांव पर है. हम बहुत पीड़ित हैं. अपनी पीड़ा व्यक्त नहीं कर सकते. हमारा बार-बार निवेदन है कि हम लोगों की सेवा बहाल कराएं और हमें सम्मान के साथ वापस लाएं. सरकार फिर बनाएंगे इसमें कोई दो राय नहीं है.
तदर्थ शिक्षक रमेश प्रताप ने कि हमें पूरी उम्मीद है क्योंकि इससे बड़ा तो कोई दरबार है नहीं. हमें पूरा विश्वास है कि जो अधिकारी गुमराह कर रहे हैं हमारे मुख्यमंत्री जी को उसमें सुधार आएगा. हमने अपनी पूरी जवानी अध्यापन में बिता दी और अब इस 50 साल की उम्र में हमें निकाल दिया जाता है तो हम कहां रहेंगे हमारे बच्चे कहां रहेंगे. हम कैसे दोषी हैं. हमारी नियुक्ति हुई डायरेक्टर ने अनुमोदन दिया फिर हम कोर्ट गए. हमें वेतन मिल रहा था लेकिन अब 25 साल बाद अचानक कैसे सुध आ गई कि यह लोग गड़बड़ हैं. हम अयोग्य हैं तो हमारे पढ़ाए बच्चे आईएएस-पीसीएस समेत बहुत सारे पदों पर कैसे हैं. जो हमने सेवा की, चुनाव ड्यूटी की, वह क्या था. अब हमें पूरा विश्वास है कि अब भगवान ही इनकी बुद्धि पलटेंगे.

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