
शरद पवार ने भतीजे अजित को दिया झटका, उनके वफादार बजरंग सोनावणे को जॉइन कराई अपनी पार्टी
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भाजपा ने पहले ही बीड लोकसभा सीट से पंकजा मुंडे की उम्मीदवारी की घोषणा कर दी है. उनकी छोटी बहन सांसद प्रीतम मुंडे ने 2019 में बीड सीट जीती थी. पंकजा और प्रीतम बीजेपी के दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटियां हैं.
अजित पवार के गुट के साथ जुड़े बजरंग सोनावणे की राजनीतिक निष्ठा बदल गई है. उन्होंने बुधवार को शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जॉइन कर ली. यह कार्यक्रम पुणे में हुआ, जिसमें शरद पवार और प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल मौजूद थे. महाराष्ट्र के बीड जिले के रहने वाले बजरंग सोनवणे को अजित पवार और धनंजय मुंडे का वफादार माना जाता था. पिछले साल एनसीपी में विभाजन के बाद वह अजित गुट के साथ थे.
जब अजित पवार एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महायुती सरकार में शामिल हुए, तो बीड जिले से राकांपा के अध्यक्ष रहते हुए बजरंग सोनवणे उनके साथ दिखे थे. बजरंग सोनवणे ने 2019 के लोकसभा चुनाव में बीड सीट से प्रीतम मुंडे के खिलाफ चुनाव भी लड़ा था और उन्हें कड़ी टक्कर दी थी. सोनवणे ने कहा कि वह किसी उम्मीद के साथ शरद पवार की एनसीपी में शामिल नहीं हुए हैं और पार्टी प्रमुख द्वारा दी गई किसी भी जिम्मेदारी को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं.
बीड से जिसे भी टिकट मिलेगा, उसका समर्थन करूंगा: बजरंग सोनावणे
बजरंग सोनावणे ने कहा कि पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव में बीड से जिसे भी उम्मीदवार बनाएगी, वह उसका समर्थन करेंगे. उन्होंने कहा, 'मैं हमेशा राकांपा के साथ था; कई पार्टी कार्यकर्ताओं ने मुझसे कहा कि उन्हें दूसरी तरफ (अजित पवार गुट) घुटन महसूस होती है. इसलिए, मैं अपने समर्थकों की ओर से यहां आया हूं...मैं यहां किसी उम्मीद के साथ नहीं आया हूं. पवार साहब मुझे जो भी जिम्मेदारी देंगे, मैं उसे बिना किसी हिचकिचाहट के स्वीकार करूंगा'.
सोनावणे ने कहा कि बीड से जो भी उम्मीदवार होगा मैं पूरी ताकत से उनका समर्थन करूंगा. पिछली बार पवार साहब ने मुझे बीड से टिकट दिया था. मैं हमेशा उनका आभारी रहूंगा. इस बीच शरद पवार ने कार्यक्रम के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि बजरंग सोनावणे को चुनावी मैदान में उतारने के बारे में वरिष्ठ नेता बैठेंगे और फैसला करेंगे.
शरद पवार ने कहा, 'बजरंग सोनावणे ने फिर से हमारे साथ वापस आने का फैसला किया है. पिछली बार, हमने उन्हें बीड से लोकसभा चुनाव लड़ने का मौका दिया था, और उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया. वह बहुत मामूली अंतर से हार गए और उन्हें 5 लाख से अधिक वोट मिले. इसके बाद उन्होंने कुछ स्थानीय मुद्दों के कारण हमें कुछ समय के लिए छोड़ दिया. इसलिए, केवल कुछ स्थानीय मुद्दों पर कोई बड़ा राजनीतिक निर्णय लेना उचित नहीं है'. शरद पवार ने पार्टी कार्यकर्ताओं को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और उन्हें आश्वस्त किया कि बीड संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार के बारे में निर्णय वरिष्ठ नेताओं द्वारा सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद किया जाएगा.

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