
वीडियो कॉल पर सुनवाई के दौरान आई तकनीकी दिक्कत, SC ने फोन पर लिया याचिकाकर्ता का बयान
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सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान वीडियो कॉल में तकनीकी दिक्कत के चलते अदालत को याचिकाकर्ता का बयान फोन को स्पीकर मोड पर रखकर सुनना पड़ा. याचिका में कोटे के तहत ओबीसी श्रेणी में छात्रों को अकेडिमिक ईयर 2018-2019 के लिए एमबीबीएस सीट से इनकार करने का दावा किया गया था.
कोरोना महामारी के दौरान जब अधिकतर मीटिंग, कोर्ट की सुनवाई और दफ्तरी काम ऑनलाइन किए जाने लगे तो मानो तकनीक की अहमियत लोगों को और अच्छी तरह से समझ में आ गई. ऐसे में कोरोना के लगभग खत्म हो जाने के बाद भी कई कंपनियां और ऑफिस ऑनलाइन ही काम कर रहे है. लेकिन सच तो ये हैं कि तकनीक किसी भी वक्त धोखा दे देती है और सारे काम अटक जाते हैं. ऐसा ही कुछ हाल में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान हुआ जब वीडियो कॉल में तकनीकी दिक्कत के चलते अदालत को याचिकाकर्ता का बयान फोन को स्पीकर मोड पर रखकर सुनना पड़ा. न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमा कोहली की पीठ एक याचिकाकर्ता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो वीडियो कॉल के जरिए जुड़ी हुई थीं. याचिका में कोटे के तहत ओबीसी श्रेणी में छात्रों को अकेडिमिक ईयर 2018-2019 के लिए एमबीबीएस सीट से इनकार करने का दावा किया गया था.
कर्मचारी राज्य बीमा धारकों के बच्चे अगर एलिजिबल हैं तो वे राष्ट्रीय स्तर पर 437 एमबीबीएस सीटों के लिए आवेदन कर सकते हैं. मामले में चूंकि वीडियो कॉल पर याचिकाकर्ता महिला की आवाज साफ नहीं थी, इसलिए बेंच ने उनका नंबर डायल किया और दलील सुनी. मामले को लेकर कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "चूंकि विचाराधीन वर्ष बीत चुका है, इस स्तर पर याचिका पर विचार करना संभव नहीं होगा".
पीठ ने अपने आदेश में दर्ज किया, "याचिकाकर्ता ने एक ऑडियो कॉल के माध्यम से अदालत से बातचीत की है. हमने उसे विस्तार से सुना है और याचिकाकर्ता ने जो कहा है उससे पता चलता है कि छात्रा (जो कि उसकी बेटी है) वर्तमान शैक्षणिक वर्ष या पिछले वर्ष के दौरान एनईईटी परीक्षा के लिए उपस्थित नहीं हुई है." इसमें कहा गया है कि छात्रा एलिजिबिलीटी क्राइटेरिया को पूरा कर अगली एनईईटी परीक्षा में बैठने के लिए स्वतंत्र है और उसके बाद भी यदि शिकायत बनी रहती है, तो उचित राहत के लिए मामला उच्च न्यायालय या शीर्ष अदालत में जाएगा. इसके बाद पीठ ने याचिका का निस्तारण कर दिया.

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