
विदेशी मीडिया में पीएम मोदी की बढ़ती आलोचना पर सक्रिय हुई सरकार
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कोविड-19 की विकट स्थिति से पैदा हुए हालात को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने मोदी सरकार की क्षमता पर सवाल खड़े किए हैं. लेकिन भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया के इस रुख का जवाब देने का फैसला किया है.
कोरोना की दूसरी लहर के चलते भारत में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं. अस्पतालों में ऑक्सीजन और बेड की कमी के चलते कोरोना संक्रमित लोगों का इलाज नहीं हो पा रहा है और मरीजों की जान जा रही है. कोविड-19 की विकट स्थिति से पैदा हुए हालात को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने मोदी सरकार की नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े किए हैं. कई अंतरराष्ट्रीय मैगजीन ने अपने कवर पेज पर श्मशानों में जलती लाशें, कब्रिस्तान की कतारें, अस्पताल के बाहर बदहवाश लोगों के चेहरों को दिखाते हुए भारत के संकट को बयां किया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्ट्स को एकतरफा करार दिया है. (फोटो-PTI) इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में तैनात भारतीय राजदूतों और उच्चायुक्तों के साथ वर्चुअल बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि भारत को लेकर इंटरनेशनल मीडिया में एक तरफा रिपोर्टिंग चल रही है. कोरोना संकट से निपटने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार को 'अयोग्य' करार देने के अंतरराष्ट्रीय मीडिया के नैरेटिव का जरूर जवाब दिया जाना चाहिए. India's COVID-19 crisis is spiraling out of control. It didn't have to be this way https://t.co/jMaL7wZSx7 pic.twitter.com/QA9FCsH6Qp (फोटो-PTI)
ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









