विदेशी फंडिंग, 15 दिन और पुलिस पर दूसरा हमला... खालिस्तान की आग में फिर तप रहा पंजाब?
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पंजाब में 15 दिनों के भीतर ये दूसरी ऐसी घटना है. जहां खालिस्तान समर्थित लोगों ने पुलिस पर हमला किया गया है. इतना ही नहीं, खालिस्तानी तत्वों ने खुले तौर पर पुलिस प्रशासन को धमकी तक दी है. दिलचस्प बात यह है कि पुलिस ने दोनों मामलों में बल का प्रयोग नहीं किया. पुलिस पर राजनीतिक दबाव की भी चर्चा होने लगी है.
तलवारें चमकाते, बंदूकें लहराते, लाठियां भांजते और शोर मचाते खालिस्तान समर्थक संगठन ने अमृतसर में गुरुवार को एक थाने पर हमला बोल दिया. ये हमला इसलिए था, क्योंकि पुलिस ने खालिस्तान समर्थिक अमृतपाल सिंह के करीबी को गिरफ्तार किया था. अपने करीबी को छुड़ाने पहुंचे अमृतपाल के लोगों ने जमकर बवाल काटा. इस दौरान खालिस्तान समर्थित संगठन 'वारिस पंजाब दे' के लोग थाने पर टूट पड़े और पुलिस की गाड़ियां तोड़ने लगे. इस दौरान उन्होंने पुलिस पर भी हमला किया. जिसके बाद पुलिसकर्मी जैसे-तैसे जान बचाकर भागे.
पंजाब में 15 दिनों के भीतर ये दूसरी ऐसी घटना है. जहां खालिस्तान समर्थित लोगों ने पुलिस पर हमला किया गया है. खालिस्तानी तत्वों ने खुले तौर पर पुलिस प्रशासन को धमकी तक दी है. दिलचस्प बात यह है कि पुलिस ने दोनों मामलों में बल का प्रयोग नहीं किया. जिसके बाद चर्चा है कि पुलिस पर राजनीतिक दबाव रहा, ऐसे में पुलिस कोई ठोस एक्शन नहीं सकी. वहीं इन मामलों पर सत्ताधारी पार्टी की तरफ से भी कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं है. गुरुवार को हुई इस घटना के बाद ऐसा लगता है कि पुलिस भी बैकफुट पर आ गई है. कारण, पंजाब पुलिस का कहना है कि अमृतपाल सिंह ने इस मामले में जो सबूत दिए हैं, उससे ऐसा लगता है कि पकड़ा गया आरोपी लवप्रीत मामले में शामिल नहीं था.
पहली घटना मोहाली में 8 फरवरी 2023 को हुई थी. जिसमें 33 पुलिस घायल हो गए थे. तब खलिस्तानी तत्वों ने पुलिस से एक आंसू गैस हैंडगन, गोला-बारूद छीन लिया था और पुलिसकर्मियों को मारने की कोशिश की थी. हमलावरों में कट्टरपंथी नाबालिग लड़के भी शामिल थे. इस दौरान ये लोग खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे. इस दौरान भी पुलिस हिरासत से आरोपियों को छोड़ाने के लिए एक संगठन के लोगों ने पुलिस टीम पर हमला किया था.
दूसरी घटना अजनाला में गुरुवार 23 फरवरी को हुई. जहां खालिस्तान समर्थिक अमृतपाल सिंह के करीबी लवप्रीत सिंह उर्फ तूफान सिंह को छुड़ाने के लिए लोगों ने थाने पर धावा बोल दिया. इस दौरान पुलिसकर्मियों से मारपीट भी हुई, जिसमें 6 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए. इतना ही नहीं, अमृतपाल अपने करीबी को थाने से लेकर भी चला गया. इन दोनों घटनाओं के बाद ये बात तो साफ है कि खालिस्तानी गुटों पर नरमी दिखाने से ही उनके साहस को बढ़ावा मिल रहा है. इतना ही नहीं, अगर इन पर पंजाब सरकार ने सख्ती नहीं दिखाई तो भविष्य में ये इसी तरह खुलेआम कानून को अपने हाथों में लेंगे.
विदेशी फंडिंग खालिस्तानी आंदोलन को दे रही बढ़ावा?
सूत्रों की मानें तो अमृतपाल सिंह और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज नहीं करने को लेकर पुलिस पर दबाव बनाया गया. साथ ही विदेशी फंडिंग राज्य में खालिस्तानी आंदोलन को बढ़ावा दे रही है. अलगाववादी और अन्य संगठनों को विदेशों से मिल रही फंडिंग से इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा मिल रहा है. कम से कम आठ देशों में खालिस्तानी सहानुभूति रखने वाले लोग भारत और भारतीय संविधान के खिलाफ षड्यंत्र रच रहे हैं. वहीं पंजाब में कट्टरपंथी खलिस्तानी तत्वों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है.

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