
वाराणसी: मौत कोरोना से...डेथ सर्टिफिकेट टाइफाइड का! लापरवाही या आंकड़े छिपाने की साजिश?
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कोरोना की इस दूसरी लहर में गांव में 40-45 मौतें हो चुकी हैं. कई ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया और जो अस्पताल पहुंचे भी थे उनके कोरोना से मौत के सर्टिफिकेट में बड़ी धोखाधड़ी सामने आ रही है.
कोरोना संक्रमण की रफ्तार भले ही मंद पड़ी हो, लेकिन अभी भी मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है. अब मौतें तो ज्यादा हो ही रही हैं, बड़े स्तर पर उन्हें छिपाने की भी कवायद देखने को मिल रही है. ऐसा कहीं और नहीं, बल्कि पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र के गांव में देखने को मिल रहा है. सेम की खेती के लिए मशहूर वाराणसी के गांव रमना में चारों ओर मातम पसरा हुआ है. दावा किया जा रहा है कि कोरोना की इस दूसरी लहर में गांव में 40-45 मौतें हो चुकी हैं. कई ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया और जो अस्पताल पहुंचे भी थे उनके कोरोना से मौत के सर्टिफिकेट में बड़ी धोखाधड़ी सामने आ रही है. इसी धोखाधड़ी का शिकार हुआ है रमना गांव का पटेल परिवार भी.
झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

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