
रेप पीड़िता की कुंडली मिलान के HC के आदेश पर रोक, SC ने कहा- ज्योतिष को न्यायिक प्रक्रिया में शामिल करना ठीक नहीं
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सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश पर रोक लगा दी. हाई कोर्ट ने लखनऊ विश्वविद्यालय को एक रेप पीड़िता की कुंडली मिलान का आदेश दिया था. दरअसल रेप के आरोपी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफसर ने पीड़िता से इस आधार पर शादी करने से इनकार कर दिया था कि वह मांगलिक है. इस केस की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने यह आदेश दे दिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें एक रेप पीड़िता की कुंडली देखने के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग को कहा गया था. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी प्रोफेसर, शिकायतकर्ता और यूपी सरकार को नोटिस जारी कर मांगा जवाब. अब इस मामले में 10 जुलाई को अगली सुनवाई होगी. सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि हमें समझ नहीं आया कि हाई कोर्ट इस मामले में मेरिट को किनारे कर ज्योतिष में क्यों घुस गया? जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस पंकज मित्तल की पीठ के सामने सुनवाई शुरू हुई तो जस्टिस धूलिया ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि आपने ये देखा है? एसजी ने कहा कि हां, ये वाकई परेशान करने वाला है.
हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील अजय सिंह ने कहा कि ये कुंडली मिलान का मुद्दा आपसी सहमति से हुआ. यूनिवर्सिटी इसे विज्ञान मानकर डिग्री देती है. एसजी ने कहा कि इस मामले में कुंडली मिलान का कोई तुक नजर नहीं आता. ज्योतिष को इस तरह न्यायिक प्रक्रिया में शामिल नहीं करना चहिए. जस्टिस धूलिया की अगुआई वाली खंडपीठ ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई पर ये मामला मेरिट के आधार पर सुना जाए. खंडपीठ ने कहा कि हाई कोर्ट इस मामले में केस की मेरिट पर सुनवाई करेगा न कि ज्योतिष विभागाध्यक्ष से कुंडलियों के मिलान पर जमा की गई सीलबंद रिपोर्ट पर.
रेप के आरोपी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफसर ने रेप पीड़िता से यह कहकर शादी करने से मना कर दिया कि वो मांगलिक है. इस पर हाई कोर्ट इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस बृजराज सिंह ने शुक्रवार को आदेश दिया कि याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि लड़की मांगलिक है, लिहाजा उसकी शादी बिना मंगलिक आदमी के साथ नहीं हो सकती. लिहाजा अदालत ने यह जानने के लिए कि क्या वाकई लड़की मंगली है या नहीं दोनों पक्षकारों को लखनऊ विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर के सामने कुंडली पेश करने का आदेश दे दिए.
ज्योतिष विभागाध्यक्ष को निर्देश दिया कि वो कुंडलियों का अध्ययन और मिलान कर तीन हफ्ते में अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत को दें. सुप्रीम कोर्ट को मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से इसका पता चला तो स्वत: संज्ञान लिया. सुप्रीम कोर्ट में इस हफ्ते की जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस केवी विश्वनाथन की ग्रीष्म अवकाशकालीन पीठ मामले पर सुनवाई करेगी.

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