
रेगिस्तान में बदल चुके देश नाइजर में तख्तापलट से क्यों परेशान हुए अमीर देश, इसकी सीमाओं का बंद होना क्यों ला सकता है तबाही?
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अफ्रीकी मुल्क नाइजर में तख्तापलट हो चुका है. सेना ने कमान संभालते हुए वहां के राष्ट्रपति को हिरासत में ले लिया, और सीमाएं सील कर दीं. लेकिन सुदूर अफ्रीकी देश की उथलपुथल से हमारा क्या वास्ता? वास्ता तो है, और हमारा ही नहीं, अमेरिका-रूस जैसे देशों का भी है. असल में नाइजर में फिलहाल दुनिया में सबसे ज्यादा यूरेनियम का भंडार है.
नाइजर में हो रही उठापटक की गूंज पूरी दुनिया, खासकर ताकतवर देशों तक पहुंच रही है. वैसे तो अफ्रीका लगातार ही अस्थिर रहता है, लेकिन ये मामला अलग है. हाल ही में वहां के राष्ट्रपति मोहम्मद बजौम को सत्ता से हटाकर सेना ने उसपर कब्जा कर लिया. अब देश में सैन्य शासन है. इधर अमेरिका और यूरोपियन यूनियन दोनों ने ही सेना के खिलाफ राष्ट्रपति की मदद की बात की. रूस भी कहां पीछे रहने वाला था. वो सरकार के खिलाफ सेना का साथ देने की कह रहा है.
फिलहाल ये दोनों ही पेशकश होल्ड पर है क्योंकि सेना ने देश की सीमाएं तक सील कर रखी हैं और किसी को भी दखल देने पर धमकाया है.
तख्तापलट क्यों हुआ इसकी एक वजह खुद नाइजर के राष्ट्रपति मोहम्मद बजौम हैं. पिछले चुनाव के समय से ही बजौम पर आरोप लगता रहा कि वे देश के मूल निवासी नहीं, बल्कि बाहरी हैं. असल में वे अरब माइनोरिटी ग्रुप से हैं, जिनका संबंध मिडिल ईस्ट से रहा. ये भले ही अफ्रीका में बस गए, लेकिन स्थानीय लोगों ने उन्हें कभी स्वीकार नहीं किया.
सैन्य गुस्से का एक कारण आतंकी समूह भी रहे बाकी देशों से खदेड़े हुए आतंकी गुट फिलहाल यहां शरण लिए हुए हैं. नाइजर समेत ज्यादातर अफ्रीकी देश अक्सर बाकी दुनिया से कटे रहते हैं, और अगर यहां कुछ होता भी है तो किसी को खास फर्क नहीं पड़ता. ये आतंकियों जैसे अलकायदा और इस्लामिक स्टेट के लिए जन्नत बना हुआ था. यहीं पर बोको हराम का भी काम चल रहा था. चुनी हुई सरकार इसे कंट्रोल नहीं कर पा रही थी. यही देखते हुए सेना ने कमान अपने हाथ में ले ली.
यूरेनियम सप्लायर है ये देश

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