
'रिटायरमेंट के बाद माधबी बुच को नहीं दी गई सैलरी', विवाद पर आया ICICI बैंक का बयान
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कांग्रेस ने SEBI की अध्यक्ष माधबी पुरी बुच पर आईसीआईसीआई बैंक से रिटायरमेंट के बाद भी सैलरी हासिल करने का आरोप लगाया था. बैंक ने अब इन आरोपों को निराधार बताते हुए कड़ा खंडन किया है और उचित कानूनी कदम उठाने की बात कही है. कांग्रेस पार्टी ने हालांकि, 2017 से मिलने वाली रकम का ब्यौरा भी पेश किया था.
आईसीआईसीआई बैंक ने सेबी प्रमुख पर कांग्रेस पार्टी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों का खंडन किया है. कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सेबी की सदस्य रहते माधबी बुच ने बैंक की तरफ से रेगुलर इनकम के तौर पर 16.8 करोड़ रुपये हासिल किए. बैंक ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें सैलरी नहीं दी जा रही थी, बल्कि रिटायरमेंट बेनिफिट दिए जा रहे थे.
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि बुच ने 2017 से 2024 के बीच आईसीआईसीआई बैंक, आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल, ईएसओपी से 16.80 करोड़ रुपये हासिल किए थे. कांग्रेस का दावा था कि बुच ने सेबी चीफ रहते इतनी सैलरी नहीं पाई, जितनी कि उन्हें प्राइवेट बैंक से मिल रहे थे.
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रिटायरमेंट के बाद सैलरी नहीं, रिटायरमेंट बेनिफिट मिला!
आईसीआईसीआई बैंक ने एक बयान में स्पष्ट किया कि बुच को उनकी रिटायरमेंट के बाद बैंक या उसकी समूह कंपनियों द्वारा कोई सैलरी नहीं दिया गया है या कोई ईएसओपी भी नहीं दिया गया है, सिवाय उनके रिटायरमेंट बेनिफिट्स के.
बैंक की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, "यह ध्यान देने वाली बात है कि उन्होंने 31 अक्टूबर, 2013 से रिटायरमेंट का विकल्प चुना था. आईसीआईसीआई समूह में अपने रोजगार के दौरान, उन्हें लागू नीतियों के मुताबिक, सैलरी, रिटायरमेंट बेनिफिट्स, बोनस और ईएसओपी के रूप में मुआवजा मिला.

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