
राहुल गांधी ने वायनाड छोड़ रायबरेली को ही क्यों चुना? 5 पॉइंट में समझें कांग्रेस की रणनीति
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राहुल गांधी जब 2019 में गांधी परिवार के गढ़ रहे अमेठी में बीजेपी के स्मृति ईरानी से हार गए थे, तब वायनाड ने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुनकर भारत की संसद में भेजा था. फिर राहुल ने मुश्किल की घड़ी में अपना साथ देने वाले वायनाड को छोड़कर रायबरेली को क्यों चुना? दरअसल, यह निर्णय पार्टी की रणनीति का संकेत देती है.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वायनाड लोकसभा सीट छोड़ने का फैसला किया है. वह अपने रायबरेली से सांसद बने रहेंगे. पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रियंका गांधी वायनाड सीट पर होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस की आधिकारिक प्रत्याशी होंगी. बता दें कि राहुल गांधी ने हाल में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों में अपनी दोनों सीटों- वायनाड और रायबरेली पर प्रभावशाली अंतर से जीत हासिल की थी. नई दिल्ली में पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने चर्चा के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस फैसले की घोषणा की.
राहुल गांधी जब 2019 में गांधी परिवार के गढ़ रहे अमेठी में बीजेपी के स्मृति ईरानी से हार गए थे, तब वायनाड ने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुनकर भारत की संसद में भेजा था. फिर राहुल ने मुश्किल की घड़ी में अपना साथ देने वाले वायनाड को छोड़कर रायबरेली को क्यों चुना? दरअसल, यह निर्णय पार्टी की रणनीति का संकेत देती है. 2024 के लोकसभा चुनाव नतीजों से उत्साहित कांग्रेस आक्रामक रुख अपना रही है. लेखक और राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई ने आजतक से कहा, 'कांग्रेस का यह फैसला एक मजबूत और सोचा-समझा राजनीतिक संदेश है'.
किदवई के मुताबिक कांग्रेस 2029 के आम चुनावों से पहले के समय का अच्छा उपयोग करना चाहती है. नरेंद्र मोदी 2014 और 2019 के मुकाबले राजनीतिक रूप से कमजोर स्थिति में हैं, क्योंकि केंद्र में इस बार पूर्ण बहुमत की नहीं बल्कि गठबंधन सरकार है. राहुल और प्रियंका गांधी दोनों को संसद में रखकर विपक्ष को धार देने का यह प्रयास कांग्रेस कर रही है'. राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के प्रचार अभियान का नेतृत्व किया. उन्होंने केरल के वायनाड के बजाय उत्तर प्रदेश की रायबरेली लोकसभा सीट से सांसद रहना क्यों चुना, हम इसके पांच कारण आपको बता रहें हैं...
1) यूपी में खोई जमीन पाने की उम्मीद
2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में छह सीटें जीतीं. 2019 में उसे सिर्फ रायबरेली सीट पर जीत मिली थी. इंडिया ब्लॉक ने यूपी में 43 सीटें जीतीं, जिनमें से 37 समाजवादी पार्टी ने जीतीं. यह एनडीए के लिए एक बड़ा झटका था, जिसने 2019 में यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से 62 सीटें जीती थीं. 2024 के चुनाव में, एनडीए सिर्फ 36 सीटें जीतने में कामयाब रही, जबकि बीजेपी को 33 सीटें हासिल हुईं. वोट शेयर के मामले में सबसे बड़ी हार मायावती के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को हुई. इसका वोट शेयर 19% से घटकर 9% रह गया.
ये वोट मुख्य रूप से समाजवादी पार्टी के साथ-साथ कांग्रेस को भी मिले। अगर एसपी ने बीएसपी के वोट शेयर का 6-7% हासिल किया, तो कांग्रेस को 2-3% का फायदा हुआ. कांग्रेस को उम्मीद है कि वह उत्तर प्रदेश में दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण वोटों का फायदा उठा सकती है. राहुल गांधी द्वारा वायनाड के बजाय रायबरेली सीट चुनने का पहला कारण यही नजर आता है.

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