
राहुल गांधी की 4 मांगें मानकर चुनाव आयोग चाहे तो गंगा नहा सकता है
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राहुल गांधी लगातार चुनावों को लेकर कई मुद्दे उठा रहे हैं. उनमें बहुत सी बातें फिजीबल नहीं हो सकती हैं. पर उनकी चार मांगें ऐसी हैं जिन पर चुनाव आयोग को विचार करना चाहिए. ये ऐसी डिमांड्स हैं जिन्हें पूरा करके आयोग चुनावों पर भारतीय जनता का भरोसा बढ़ा सकता है.
9 दिसंबर 2025 को लोकसभा में राहुल गांधी ने चुनाव आयोग (Election Commission of India - ECI) की विश्वसनीयता पर एक बार फिर जोरदार हमला किया. उन्होंने बाद में ट्वीट कर के भी अपनी खास चार मुख्य मांगों के लिए फिर से चुनाव आयोग का याद दिलाया है. राहुल गांधी का कहना है कि अगर चुनाव आयोग इन बातों को मान ले तो चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता बढ़ जाएगी. ये मांगें सिर्फ विपक्ष की शिकायत नहीं हैं, बल्कि पिछले एक दशक में ECI पर लगे आरोपों का सार हैं . जैसे EVM टैंपरिंग, वोटर लिस्ट में फर्जीवाड़ा, और संस्थागत कब्जा. राहुल इसी आधार पर वोट चोरी का आरोप लगाते रहे हैं.
राहुल गांधी का लोकसभा में भाषण संविधान की रक्षा और चुनावी सुधार पर केंद्रित था. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने ECI सहित कई संस्थानों पर कब्जा कर लिया है, जो लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है. उन्होंने तीन सवाल उठाए कि (1) मुख्य न्यायाधीश (CJI) को चुनाव आयुक्त चयन समिति से क्यों हटाया गया? (2) चुनाव आयुक्तों को कानूनी कार्रवाई से इम्यूनिटी क्यों दी गई? (3) CCTV फुटेज मिटाने का नियम क्यों बदला गया? ये सवाल सीधे ECI की निष्पक्षता पर हमला करते हैं.
राहुल गांधी के इन डिमांड्स को राजनीतिक चश्मे को उतारकर देखें तो लगता है कि चुनाव आयोग को इन मांगों को पूरा करने में हर्ज क्या है. इससे तो आयोग की विश्वसनीयता ही बढ़ेगी. हालांकि ये बात भी सही है कि इन डिमांड्स का कोई अंत नहीं है. चुनाव आयोग ज्यों ही इन मांगों को मान लेगा , विपक्ष की ओर से नई मांगों का पुलिंदा हाजिर हो जाएगा. पर किसी भी लोकतंत्र के लिए इस तरह के डिमांड को पूरा करते रहना हेल्दी टैक्टिस माना जाता है.
1-पहली मांग: चुनाव से कम से कम एक महीने पहले मशीन-रीडेबल वोटर लिस्ट सार्वजनिक हो
यह मांग वोटर लिस्ट की पारदर्शिता से जुड़ी है. वर्तमान में ECI वोटर लिस्ट PDF फॉर्मेट में जारी करता है, जो स्कैन इमेज होती हैं. इन्हें OCR (Optical Character Recognition) से पढ़ा जा सकता है, लेकिन मशीन-रीडेबल फॉर्मेट (जैसे CSV, Excel या JSON) न होने से डेटा एनालिसिस मुश्किल है. परिणामस्वरूप, फर्जी वोटर, डुप्लीकेट एंट्री, या मृतकों के नाम आसानी से पकड़े नहीं जाते.
2019 चुनावों में उत्तर प्रदेश में 1.2 करोड़ फर्जी वोटर के आरोप लगे. 2024 में महाराष्ट्र और हरियाणा में विपक्ष ने दावा किया कि लाखों नाम गायब थे. ECI का ERONET सिस्टम पूरा डेटाबेस रखता है, लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया जाता. राहुल की मांग है कि चुनाव से 30 दिन पहले मशीन-रीडेबल लिस्ट जारी हो, ताकि पार्टियां, NGO और नागरिक जांच कर सकें.

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