
कांग्रेस नेतृत्व को राज्यों में 'पावर शेयरिंग' का दिग्विजय-फॉर्मूला पसंद क्यों नहीं आता?
AajTak
कर्नाटक कांग्रेस संकट के लिए दिग्विजय सिंह ने एक फॉर्मूला बताया है. दिग्विजय सिंह का कहना है कि नेतृत्व उसे सौंपा जाए, जिसके समर्थन में ज्यादा विधायक हों - मुश्किल ये है कि ये फॉर्मूला लागू कौन कराएगा? राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेतृत्व अपना वादा तो पूरा नहीं ही कर सका.
कांग्रेस का कर्नाटक संकट अभी खत्म नहीं हुआ है. भले ही ब्रेकफास्ट पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार की बातचीत को अच्छा बताया गया हो, और सरकार बनने के समय से ही आपस में भिड़े दोनों नेताओं ने सब ठीक-ठाक होने का दावा किया हो. लेकिन, ये झगड़े को टालने जैसा ही है. असल बात तो ये है कि समस्या का कोई स्थाई समाधान नहीं निकल सका है.
कर्नाटक संकट भी बिल्कुल वैसा ही है जैसे राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीते दिनों देखा जा चुका है. तीनों ही राज्यों में 2018 में कांग्रेस को एक साथ ही सत्ता हासिल हुई थी, लेकिन कहानी का अंत अलग अलग तरीके से हुआ. मध्य प्रदेश में तो बीच में ही कमलनाथ को सत्ता से हाथ धोना पड़ा था. ज्योतिरादित्य सिंधिया तो मौका देखकर निकल लिए, लेकिन सचिन पायलट अब तक धैर्य की परीक्षा दे रहे हैं.
एजेंडा आजतक में सचिन पायलट की मौजूदगी में दिग्विजय सिंह ने कर्नाटक के सवाल पर पावर शेयरिंग का जो फॉर्मूला सुझाया है, वो समस्या का किताबी समाधान तो लगता है लेकिन हालात ऐसे हो चले हैं कि वो व्यावहारिक समाधान नहीं लगता. सीनियर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कमान में ढाई-ढाई साल के बंटवारे को अव्यावहारिक बताया है.
कर्नाटक संकट का दिग्विजय फॉर्मूला
20 नवंबर को कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के ढाई साल पूरे हुए, तो मुख्यमंत्री बदलने की चर्चा होने लगी. ये बात इसलिए क्योंकि कहा जाता है कि 2023 में डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच ऐसा ही बोलकर समझौता कराया गया था. बीच बीच में दोनों नेताओं के बीच कई बार टकराव की स्थिति महसूस की गई.
हाल फिलहाल जब बात नहीं बन पा रही थी, तो बेंगलुरु से मामला दिल्ली पहुंचा. और, पिछले हफ्ते सोनिया गांधी के सामने भी समस्या का हल निकालने की कोशिश हुई. चर्चा तो खूब हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका. कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मीटिंग के बाद बताया कि कर्नाटक को लेकर पार्टी नेतृत्व आगे भी चर्चा करेगा, ताकि इस मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझाया जा सके.

MP में जनगणना और आदिवासी पहचान को लेकर सियासत गरमा गई है. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के 'आदिवासी धर्म कोड' वाले बयान ने भारतीय जनता पार्टी को हमलावर होने का मौका दे दिया है. अमरकंटक में दिए गए इस बयान को बीजेपी ने न केवल असंवैधानिक बताया है, बल्कि इसे सरकारी काम में बाधा डालने वाला कृत्य करार दिया है.

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पैदा हुए तेल संकट के बाद पाकिस्तान ने अपने यहां पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 55 पाकिस्तानी रुपये की भारी बढ़ोतरी की है. इसके बाद वहां की जनता हलकान है, पेट्रोल पंप पर लंबी लाइनें देखी जा रही हैं. इस बीच पाकिस्तान के सीनियर जर्नलिस्ट और राजनीतिक विश्लेषक ने अपने पीएम से तीखे सवाल पूछे हैं.

मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध का असर भारत की रसोई तक पहुंच सकता है. एलपीजी सिलेंडर की कीमत 60 रुपये बढ़कर दिल्ली में 913 रुपये हो गई है. भारत अपनी जरूरत का 65-70 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है. विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध के कारण सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है.

ईरान में जंग का असर भारत पर साफ दिखने लगा है. गैस महंगी हो गई है, तेल पर संकट गहराया है, सेंसेक्स गिर रहा है और रुपया लुढ़कता जा रहा है. खाड़ी देशों में करीब 1 करोड़ भारतीयों की जान फंसी है. इन मुद्दों को लेकर संसद में विपक्ष ने जोरदार प्रदर्शन किया और चर्चा की मांग की. बजट सत्र के दूसरे चरण में सदन के अंदर-बाहर विरोध की आवाजें गूंजती रहीं. सरकार ने संसद में बयान दिया और युद्ध, सप्लाई चेन पर असर और भारतीयों के रेस्क्यू की बात कही, लेकिन विपक्ष संतुष्ट नहीं है.









