
फर्जी फर्म, नकली बिल और कोडीन कफ सिरप... ऐसे पकड़े गए अंतर्राष्ट्रीय ड्रग रैकेट में शामिल दो भाई, UP STF का एक्शन
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यूपी एसटीएफ की टीम ने लखनऊ से फेंसिडिल सप्लाई नेटवर्क चलाने वाले दो शातिर भाइयों को गिरफ्तार किया है, इन दोनों के पकड़ में आने के साथ ही फर्जी फर्मों, नकली बिलिंग और राज्यों में फैल चुके बड़े ड्रग रैकेट का खुलासा हुआ है.
Fensidyl Smuggling Racket Busted: उत्तर प्रदेश एसटीएफ (STF) ने गुरुवार तड़के एक बड़े ड्रग सिंडिकेट की कमर तोड़ते हुए दो भाइयों को गिरफ्तार कर लिया. दोनों पर आरोप है कि ये अवैध तरीके से फेंसिडिल कफ सिरप और अन्य कोडीन आधारित दवाओं का कारोबार कर रहे थे. दोनों को लखनऊ में एक संयुक्त ऑपरेशन के तहत पकड़ा गया. यह कार्रवाई उस सूचना के बाद की गई, जिसमें STF को बताया गया था कि दोनों आरोपी शहर में मौजूद हैं. उनकी गिरफ्तारी के साथ ही नेटवर्क का कई राज्यों में फैला काला कारोबार भी सामने आ गया.
टेढ़ी पुलिया के पास दबोचे गए आरोपी STF ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान साहिबाबाद के कपिल विहार के रहने वाले अभिषेक शर्मा और शुभम शर्मा के रूप में हुई है. दोनों को अलंबाग–मवैया रोड पर टेढ़ी पुलिया के नजदीक तड़के करीब 4:30 बजे रोका गया था. टीम को देखने के बाद दोनों ने बचने की कोशिश भी की, लेकिन पुलिस की घेराबंदी के सामने वे टिक नहीं सके. गिरफ्तारी के बाद उनकी तलाशी में कई अहम दस्तावेज मिले हैं.
फर्जी फार्मा फर्म का भंडाफोड़ छापेमारी के दौरान STF को दो मोबाइल फोन और 31 ऐसे दस्तावेज मिले जो एक फर्जी फार्मास्यूटिकल कंपनी से जुड़े हुए थे. यह वही कंपनी थी जिसके नाम पर संवेदनशील कफ सिरप की सप्लाई दिखाई जाती थी. दस्तावेजों की जांच से पता चला कि बड़ी मात्रा में नकली बिलिंग, फर्जी खरीद और फर्जी बिक्री के कागज़ तैयार किए गए थे. इससे रैकेट के संचालन का तरीका साफ हो गया.
दिल्ली से लखनऊ तक सक्रिय था अभिषेक STF को इनपुट मिला था कि अभिषेक शर्मा, जो एबॉट कंपनी का दिल्ली-बेस्ड डिस्ट्रीब्यूटर रहा है, वह अपने छोटे भाई के साथ लखनऊ आया है. दोनों के बस से उतरकर हजरतगंज जाने की जानकारी मिली थी. इसी सूचना पर STF और स्थानीय पुलिस ने एक संयुक्त टीम बनाकर जाल फैलाया और दोनों शातिर भाईयों को धर दबोचा. दरअसल, अभिषेक शर्मा पहले से ही वॉन्टेड चल रहा था.
GR ट्रेडिंग के जरिए काला कारोबार पूछताछ में आरोपी अभिषेक शर्मा ने बताया कि वह साल 2019 से GR ट्रेडिंग में काम कर रहा था. यह फर्म विशाल सिंह और विभोर राणा की थी. शुरुआत में वह सिर्फ लोडिंग-अनलोडिंग और रिकॉर्ड रखने का जिम्मा संभालता था. लेकिन धीरे-धीरे वह पूरे नेटवर्क के संचालन का हिस्सा बन गया. इसी दौरान उसने फेंसिडिल समेत कई संवेदनशील दवाओं का अवैध रूट समझ लिया था.
बंगाल से बांग्लादेश तक सप्लाई अभिषेक शर्मा ने खुलासा किया कि फर्म के मालिक फर्जी कंपनियों के जरिए बड़ी मात्रा में फेंसिडिल खरीदते थे. बाद में इन दवाओं को नशे के रूप में तस्करों को बेच दिया जाता था. यह नेटवर्क बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल से आगे बांग्लादेश तक फैला हुआ था. यानी यह सिर्फ राज्य स्तर का नहीं, बल्कि इंटरनेशनल रैकेट था.

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