
राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ पाएंगे धरती पकड़ जैसे लोग, निर्वाचन आयोग ने लगाई ये शर्तें
AajTak
राष्ट्रपति चुनाव के लिए कोई भी आदमी नामांकन कर सकता है, लेकिन अब इस पद पर अपनी उम्मीदवारी जताने के लिए किसी भी नागरिक को 50 प्रस्तावक और 50 ही समर्थक चाहिए होंगे. ये बुनियादी शर्तों में शामिल हैं.
राष्ट्रपति चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं. इस बार का राष्ट्रपति चुनाव पहले से अलग होगा, दरअसल भारतीय निर्वाचन आयोग ने कुछ ऐसी शर्तें लगाई हैं, जिसकी वजह से धरती पकड़ और घोड़े वाला जैसे आम लोग अपनी उम्मीदवारी का परचम नहीं लहरा पाएंगे. बिहार के रहने वाले नागरमल उर्फ धरती पकड़ अब तक 281 चुनाव लड़ चुके हैं. धरती पकड़ ने 2012 के राष्ट्रपति चुनाव में प्रणब मुखर्जी के खिलाफ भी नामांकन किया था, जो रद्द हो गया था.
राष्ट्रपति चुनाव के लिए कोई भी आदमी नामांकन कर सकता है, लेकिन अब इस पद पर अपनी उम्मीदवारी जताने के लिए किसी भी नागरिक को 50 प्रस्तावक और 50 ही समर्थक चाहिए होंगे. ये बुनियादी शर्तों में शामिल हैं. ये प्रस्तावक और समर्थक आम नागरिक नहीं बल्कि निर्वाचक मंडल के सदस्य यानी सांसद या विधायक होने जरूरी हैं.
अब 50-50 सांसद या विधायक प्रस्तावक और समर्थक के रूप में ढूंढ पाना आम लोगों के बस की बात तो नहीं होती और हां शर्त ये भी कि प्रस्तावक और समर्थक एक ही भूमिका में रह सकते हैं. यानी जो प्रस्तावक होगा, वो समर्थक नहीं हो सकता. राष्ट्रपति चुनाव के लिए जमानत राशि भी पहले के ₹5000 के मुकाबले अब ₹15000 कर दी गई है. निर्वाचन आयोग ने इस बार नामांकन के लिए प्रस्तावक और समर्थकों की संख्या की शर्त इसलिए लगाई है ताकि ऐसे लोग इस चुनाव से दूर रहें, जिन्हें एक भी वोट नहीं मिलता है.
दरअसल 15 हजार रुपये ज्यादा बड़ी राशि तो है नहीं, इसलिए निर्वाचन आयोग ने इसके साथ 50 प्रस्तावक और 50 समर्थकों की शर्त नामांकन पत्र भरते समय ही लगा दी. निर्वाचन आयोग के सूत्रों के मुताबिक, पिछले राष्ट्रपति चुनाव में कई बार ऐसा भी हुआ है कि 15 से 20 प्रत्याशी चुनाव मैदान में डटे रहे लेकिन उन्हें एक भी वोट नहीं मिला. कुछ ऐसे भी लोग हैं जो हर साल हर बार चुनाव में बस यूं ही अपनी दावेदारी कर देते थे. प्रस्तावक और समर्थक जुटाने की शर्त से ऐसे लोगों पर लगाम लगी है, लेकिन लोगों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया. अब वे बिना प्रस्तावक और समर्थकों के नामांकन भर रहे थे.
ये भी पढ़ें- Bhagalpur: इस बार कहां हैं बिहार के 'धरती पकड़', चुनाव में क्यों नहीं आ रहे नजर?
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति निर्वाचन अधिनियम, 1952 की धारा 4 की उप-धारा (3) के उपबंधों के अनुसार, राष्ट्रपति का कार्यकाल पूरा होने से पहले 60 दिन की अवधि में किसी भी दिन निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव की अधिसूचना जारी की जाती है. चुनाव का कार्यक्रम इस प्रकार तय किया जाता है कि राष्ट्रपति का कार्यकाल खत्म होने के अगले ही दिन निर्वाचित राष्ट्रपति पद ग्रहण कर सकें. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के मुताबिक राष्ट्रपति के पद पर चुनाव भी निर्वाचन आयोग ही करवाता है.

Guna Hawala Scandal: गुना का हाईप्रोफाइल हवाला कांड अब एक नई करवट ले रहा है. जहां एक तरफ ट्रेनी IPS आयुष जाखड़ की जांच टीम गुजरात के व्यापारी को बयान के लिए बुला रही है, वहीं दूसरी तरफ निवर्तमान एसपी अंकित सोनी के तबादले ने शहर में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. 'लेडी सिंघम' हितिका वासल ने कमान संभाल ली है, लेकिन अंकित सोनी के समर्थन में हिंदू संगठन सड़कों पर उतर आए हैं.

इजरायल अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है, इस युद्ध के चलते भारत में भी ऊर्जा संकट पैदा हो रहा था, इसी संकट को लेकर पीएम मोदी ने आज संसद में पहली बार सार्वजनिक तौर पर बयान दिया. पश्चिम एशिया में जंग के हालातों पर पीएम मोदी ने लोकसभा में 25 मिनट की स्पीच दी उन्होंने कहा कि तनाव खत्म होना चाहिए. बातचीत से ही समस्या का समाधान है. पीएम ने कहा कि नागरिकों और पावर प्लांट पर हमले मंजूर नहीं हैं. होमुर्ज का रास्ता रोकना स्वीकार नहीं होगा ‘सरकार की कोशिश है कि देश में तेल-गैस संकट न हो. इसके लिए 27 की जगह अब 41 देशों से इंपोर्ट कर रहे हैं. पश्चिम एशिया में एक करोड़ भारतीय रहते हैं. उनकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है.

हैदराबाद में आगामी रामनवमी शोभा यात्रा को लेकर गोशामहल के विधायक टी. राजा सिंह ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि साल 2010 से लगातार शोभा यात्रा आयोजित की जा रही है, लेकिन हर साल पुलिस की ओर से बाधाएं खड़ी की जाती हैं. उनका आरोप है कि सिदंबर बाजार, पुराना पुल और बेगम बाजार जैसे इलाकों में विशेष रूप से लाठीचार्ज के लिए टास्क फोर्स तैनात की जाती है. साथ ही उन्होंने दावा किया कि हर साल उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाती है और इस बार भी पुलिस अपनी गलतियों का ठीकरा उन पर फोड़ सकती है.










