
राम मंदिर में दिखेगा भारतीय संस्कृति और परंपरा का संगम, मौसम के साथ बदलेंगे राम दरबार के वस्त्र
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भगवान राम के बाल स्वरूप में तो उनका मासूम और सौम्य रूप दिखता है, लेकिन राम दरबार में उनका एक भव्य और राजसी रूप प्रस्तुत किया जाएगा. इस रूप में भगवान राम राजा के रूप में प्रतिष्ठित होंगे, जिनकी पोशाक में रॉयल एलिमेंट्स जैसे मुकुट, कमरबंध, सोने-चांदी की कढ़ाई, रत्नजड़ित वस्त्र आदि शामिल होंगे.
राम दरबार में भारतीय संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा. अयोध्या के भव्य राम मंदिर में विराजमान बाल स्वरूप राम की तरह अब भगवान राम की पोशाक भी पूरी तरह से भारतीय पारंपरिक कपड़ों से ही तैयार की जाएगी. ये सिर्फ एक धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि भारत की विविध संस्कृति का उत्सव भी होगा.
राम मंदिर में हर दिन भगवान की सेवा और पूजा के लिए एक विस्तृत एसओपी पहले से ही लागू है, जिसमें उनकी दैनिक आरती, स्नान, भोग और वस्त्र-विन्यास का विशेष ध्यान रखा जाता है. अब इसी परंपरा को एक नई सांस्कृतिक ऊंचाई पर ले जाया जा रहा है, जिसमें भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान की पोशाकें भारत के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक पोशाकों से प्रेरित होंगी. राम दरबार के ड्रेस भी मनीष तिवारी ही डिजाइन कर रहे हैं जिन्हें राम मंदिर में भगवान राम की पोशाक को डिजाइन करने का सौभाग्य प्राप्त है.
राजसी वैभव से सजेगा राम दरबार भगवान राम के बाल स्वरूप में तो उनका मासूम और सौम्य रूप दिखता है, लेकिन राम दरबार में उनका एक भव्य और राजसी रूप प्रस्तुत किया जाएगा. इस रूप में भगवान राम राजा के रूप में प्रतिष्ठित होंगे, जिनकी पोशाक में रॉयल एलिमेंट्स जैसे मुकुट, कमरबंद, सोने-चांदी की कढ़ाई, रत्नजड़ित वस्त्र आदि शामिल होंगे.
राम दरबार के ड्रेस डिजायनर मनीष तिवारी का कहना है कि ये पोशाकें इस तरह बनाई जाएंगी कि उनमें न केवल भव्यता हो, बल्कि श्रद्धालु जब दर्शन करें तो उन्हें भारत की सांस्कृतिक विविधता और ऐतिहासिक समृद्धि का अनुभव भी हो.
हर राज्य की संस्कृति की होगी झलक इस विशेष योजना के अंतर्गत भगवान की पोशाकों में दो या दो से अधिक राज्यों के पारंपरिक वस्त्रों का समावेश किया जाएगा. उदाहरण के लिए, एक दिन भगवान राम की पोशाक बनारसी रेशम और राजस्थान की बंधेज शैली में हो सकती है, तो किसी अन्य दिन दक्षिण भारत के कांचीपुरम सिल्क और उड़ीसा के सम्पलपुरी फैब्रिक का मिश्रण देखने को मिल सकता है. यह न केवल धार्मिक भावनाओं का सम्मान होगा, बल्कि भारत की कपड़ा परंपरा को भी एक वैश्विक मंच मिलेगा. पोशाकों का चयन और निर्माण विशेष तौर पर मंदिर समिति के अधीन काम करने वाले डिज़ाइन विशेषज्ञों, कारीगरों और संस्कृति के जानकारों द्वारा किया जा रहा है. इन पोशाकों में ज़रदोज़ी, कांथा, चिकनकारी, पटोला, कांचीवरम, इक्कत, और खादी जैसे कई परंपरागत डिज़ाइन शामिल होंगे.
हर दिन बदलेंगे भगवान के वस्त्र, रंगों का भी रहेगा विशेष चयन भगवान की मूर्तियों पर प्रतिदिन वस्त्र बदलने की परंपरा पहले से ही रही है. अब उसी तरह राम दरबार के सभी देवताओं की पोशाकें भी रोज़ बदली जाएंगी. हर दिन एक विशेष रंग को समर्पित होगा, जो पंचांग और भारतीय परंपरा के अनुसार तय किया जाएगा. रंगों का यह निर्धारण न केवल सौंदर्यबोध के लिए होगा, बल्कि इसके पीछे गहराई से जुड़े धार्मिक और ज्योतिषीय कारण भी होंगे.

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