
रामविलास पासवान: दलितों का पासबां, जेपी का शिष्य और सदियों से अंधेरे घरों में दीया जलाने निकला नेता
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रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan) आज जीवित होते तो 75 साल के हो गए होते, अमृत महोत्सव मना रहे होते. आज उनकी पहली जयंती है. देश की आजादी से लगभग एक साल पहले 5 जुलाई 1946 को पैदा हुए रामविलास पासवान का निधन पिछले साल 8 अक्टूबर 2020 को हुआ था.
दलितों का पासबां, रामविलास पासवान. पासबां यानी कि रक्षक, दरबान, निरीक्षक, ड्योढ़ीबान, पहरवां. आप जो कुछ कह लें. रामविलास पासवान अपने आप को इसी रूप में देखना चाहते थे. गरीबों-पिछड़ों और समाज के हाशिये पर मौजूद लोगों के साथ खुद को खड़े. रामविलास पासवान ने अपने एक इंटरव्यू में फटेहाल-जर्जर 'बलगोबिना' डोम की कहानी बताई थी? फिर सिस्टम की पहल से समाज में उन्हें कैसे प्रतिष्ठा मिली और कैसे वो 'बालगोविंद भाय' बने इसका वृतांत भी बताया था.
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