
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, 2018 के भाषण को आपत्तिजनक बताने वाली याचिका खारिज
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साल 2018 में अलवर में चुनावी रैली के दौरान यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक भाषण पर उनके विरोधियों ने आपत्ति दर्ज की थी. इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से ही इनकार करते हुए इसे सिरे से खारिज कर दिया. SC ने कहा कि ऐसी याचिकाएं अखबारों के पहले पेज पर खबर छपने की मंशा से ही दाखिल की जाती हैं.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में राजस्थान के अलवर में चुनावी सभा के दौरान कथित आपत्तिजनक स्पीच के लिए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ केस दर्ज करने के निर्देश की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी.
साल 2018 में अलवर में चुनावी रैली के दौरान यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक भाषण पर उनके विरोधियों ने आपत्ति दर्ज की थी. इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से ही इनकार करते हुए इसे सिरे से खारिज कर दिया. साथ सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार भी लगाई. SC ने कहा कि ऐसी याचिकाएं अखबारों के पहले पेज पर खबर छपने की मंशा से ही दाखिल की जाती हैं. इलाहाबाद HC ने लगाई थी फटकार
उत्तर प्रदेश के निवासी नवल किशोर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी. SC से पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी इस याचिका को बदनीयती से दाखिल की हुई बताते हुए 5 हजार रुपये जुर्माना लगाया था. यहां सुप्रीम कोर्ट में जुर्माना तो नहीं लगाया लेकिन डांट के साथ अर्जी खारिज कर दी.
सीएम योगी के किस बयान पर आपत्ति?
बता दें कि साल 2018 में राजस्थान के अलवर में एक जनसभा के दौरान सीएम योगी ने कहा था कि बजरंगबली ऐसे लोक देवता हैं जो स्वयं बनवासी हैं, गिरवासी हैं, दलित हैं, वंचित हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 23 नवंबर, 2018 को राजस्थान के अलवर जिले में चुनाव अभियान के दौरान यह भाषण दिया था. सीएम योगी के इसी बयान पर आपत्ति जताते हुए मऊ के निवासी नवल किशोर शर्मा ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी.
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