
यूपी के कासगंज की भरगैन नगर पंचायत में वैक्सीन पर अफवाहें भारी, जीरो वैक्सीनेशन
AajTak
नगर पंचायत भरगैन की आबादी 30 हजार से अधिक बताई जाती है. इतनी आबादी वाले इस नगर पंचायत के लोग कोरोना को अफवाह बता रहे हैं. जिस समय दुनिया कोरोना के कहर से कराह रही है, अस्पतालों में बेड और अन्य उपकरणों की किल्लत हो रही है, यहां स्थित अस्पताल के गेट पर ताला लटका है.
कोरोना वायरस की दूसरी लहर की रफ्तार सुस्त पड़ने के साथ ही शासन-प्रशासन की ओर से वैक्सीनेशन की रफ्तार तेज करने के प्रयास किए जा रहे हैं. सरकार के प्रयासों को गांव तो गांव, नगर पंचायत भी झटका दे रहे हैं. अब यूपी के कासगंज जिले की नगर पंचायत भरगैन में एक भी व्यक्ति के वैक्सीनेशन नहीं कराने की बात सामने आई है. भरगैन के किसी नागरिक ने कोरोना टेस्ट भी नहीं कराया है. भरगैन के लोग इस कदर अफवाहों के शिकार हो गए हैं कि कोरोना महामारी के भयावह दौर में भी यहां के किसी व्यक्ति ने कोरोना की जांच नहीं कराई. इतना ही नहीं, भरगैन का कोई भी व्यक्ति कोरोना की वैक्सीन लगवाने के लिए भी अब तक स्वास्थ्य विभाग के कैंप में नहीं गया है.
आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









