
यूजीसी विवाद पर विपक्ष की चुप्पी, रणनीति ही नहीं बल्कि सियासी मजबूरी भी है?
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देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को खत्म कर समानता लाने के लिए यूजीसी ने नए नियम लागू किए हैं, लेकिन इसे लेकर अब अगड़ी जाति के लोग विरोध में उतर गए हैं. बीजेपी के नेता बेचैन हैं तो विपक्षी दल पूरी तरह से खामोश हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि विपक्ष की चुप्पी मजबूरी है या फिर रणनीति?
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने शिक्षण संस्थानों में सामाजिक भेदभाव को खत्म करने के लिए नए नियम लागू किए हैं. इस नियम को यूनिवर्सिटी कैंपस और कॉलेज में समानता लाने के लिए अहम माना जा रहा है, लेकिन अगड़ी जाति ( ब्राह्मण, क्षत्रिय, कायस्थ और वैश्य) के लोग इसके खिलाफ हैं.
यूजीसी के नए नियम खिलाफ अगड़ी जाति के लोग सड़क पर उतर गए हैं. ऐसे में सड़क से सोशल मीडिया तक विरोध हो रहा है. बीजेपी नेताओं के सामने एक बड़ा धर्म संकट खड़ा हो गया है. बीजेपी के नेताओं की सियासी बेचैनी बढ़ती जा रही है तो विपक्ष के सामने भी धर्म संकट गहरा गया है.
यूजीसी के नए नियम को लेकर विपक्ष ने पूरी तरह से चुप्पी अख्तियार कर रखी है. विपक्ष को ना विरोध करते बन रहा है और ना ही खुलकर समर्थन में खड़ा नजर आना चाहता है. ऐसे में सवाल उठता है कि यूजीसी के नए विवाद पर विपक्षी की चुप्पी रणनीति है या सियासी मजबूरी?
यूजीसी के नए नियम पर सियासी संग्राम यूजीसी के नए नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को परिभाषित किया गया है और इसे खत्म करने के लिए इक्विटी कमेटियां गठित करने का प्रावधान रखा गया. इन कमेटियों में केवल आरक्षित वर्गों (एससी, एसटी, ओबीसी) के प्रतिनिधित्व की बात कही गई है, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों-कर्मचारियों के लिए कोई पर्याप्त सुरक्षा या संतुलन का इंतजाम नहीं है. इसके चलते ही यूजीसी रेगुलेशंस 2026 को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है.
देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता लाने के लिए लागू किए नए नियम को लेकर अगड़ी जाति के तहत आने वाले ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, कायस्थ के लोग सख्त खिलाफ हैं. उनका मानना है कि यह नियम शिक्षण संस्थानों में भेदभाव पैदा करेगा. सवर्ण जाति के लोग अलग-अलग जगह पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और अपनी नाराजगी को जाहिर कर रहे हैं.
सवर्ण जातियों के विरोध और नाराजगी को देखते हुए बीजेपी नेता भी बेचैन हैं. यूपी में सवर्ण जाति के तमाम पार्टी विधायक और नेताओं ने अपनी नाराजगी भी जाहिर कर रहे हैं. बीजेपी के नेता डैमेज कन्ट्रोल भी करने की कवायद में है, लेकिन विपक्ष पूरी तरह से खामोशी अख्तियार किए हुए है.

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