
मोदी सरकार के अगले 5 साल फ्री राशन पर कितना आएगा खर्च, फूड सब्सिडी का क्या है सालाना बजट?
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Budget-2023 में अपने भाषण के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने केंद्र की मुफ्त राशन योजना को एक साल के लिए यानी 31 दिसंबर 2023 तक के लिए बढ़ाने का ऐलान किया था. अब PM Narendra Modi ने इसे दिसंबर 2028 तक के लिए बढ़ा दिया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने बीते शनिवार को बड़ा ऐलान करते हुए केंद्र द्वारा संचालित मुफ्त में राशन योजना (Free Ration Sheme) को 5 साल के लिए आगे बढ़ा दिया है. छत्तीसगढ़ के दुर्ग में एक चुनावी रैली के दौरान उन्होंने कहा कि मैंने निश्चय कर लिया है कि देश के 80 करोड़ गरीबों को मुफ्त राशन देने वाली योजना को भाजपा सरकार अब अगले 5 साल के लिए और बढ़ाएगी.
देश के 80 करोड़ जरूरतमंदों को भोजन की गारंटी देने वाली इस योजना पर सरकारी खजाने से खर्च भी बड़ा होता है, इस साल के बजट भाषण पर गौर करें तो वित्त मंत्री द्वारा Budget भाषण में बताया गया था कि साल 2023 के लिए इस योजना पर 2 लाख करोड़ रुपये खर्च को मंजूरी दी गई है. आइए समझते हैं कि अगले पांच साल में इस योजना से सराकारी खजाने पर कितना बोझ बढ़ेगा और अब तक इस पर कितना खर्च किया गया है?
दिसंबर में समाप्त हो रहा था समय Budget-2023 में अपने भाषण के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने केंद्र की मुफ्त राशन योजना को एक साल के लिए यानी 31 दिसंबर 2023 तक के लिए बढ़ाने का ऐलान किया था. अब पीएम मोदी ने इसे 5 साल और आगे बढ़ाने की घोषणा कर दी है. केंद्र सरकार की ओर से इस स्कीम को 30 जून 2020 को शुरू किया गया था. इसके बाद से जरूरतमंतों को राहत देते हुए इसकी डेडलाइन को कई बार आगे बढ़ाया जा चुका है. प्रधानमंत्री मोदी के ताजा ऐलान के बाद अब इस योजना का लाभ दिसंबर 2028 तक मिलेगा.
कोरोना के दौरान बेहद मददगार साल 2020 में जब पूरी दुनिया में कोरोना महामारी का प्रकोप जारी था, ऐसे समय में भारत भी लॉकडाउन समेत कई सख्त पाबंदियां झेल रहा था. इसके चलते लोगों के सामने अजीविका का विकराल संकट खड़ा हो गया और गरीबों को पेट भरने के लाले पड़ गए थे. इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया और फ्री राशन स्कीम की शुरुआत की. इस स्कीम के तहत शुरुआत से ही देश के करीब 80 करोड़ लोगों को मुफ्त में राशन दिया जा रहा है. प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत लाभार्थियों को 5 किलो अनाज बिल्कुल फ्री में मिलता है. इसके तहत बीपीएल कार्ड (BPL Card) वाले परिवारों को हर महीने प्रति व्यक्ति 4 किलोग्राम गेहूं और 1 किलोग्राम चावल मुफ्त दिया जाता है.
5 साल में 10 लाख करोड़ रुपये का खर्च वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण के दौरान कहा था कि इस मुफ्त राशन योजना पर चालू वित्त वर्ष में 2 लाख करोड़ रुपये खर्च किया जाएगा. इस बजट एस्टिमेट के आधार पर ही देखें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2028 तक योजना के विस्तार पर सरकारी खजाने पर जो बोझ बढ़ने वाला है, वो 10 लाख करोड़ रुपये होता है. गौरतलब है कि फूड सिक्योरिटी की दिशा में भारत सरकार की ओर से किए जाने वाले खर्च का ये आंकड़ा कई छोटे देशों के सालाना बजट से भी ज्यादा है. कोरोना काल में इस मुफ्त राशन योजना पर आने वाला बजट करीब पांच लाख करोड़ रुपये रखा गया था, लेकिन इसके बाद साल-दर-साल इसमें सरकार की ओर से कटौती की गई.
योजना की शुरुआत के बाद बजट का आंकड़ा

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