
मोजतबा ख़ामेनेई के सामने क्या है चुनौतियां, कैसे करेंगे वो अमेरिका और इसराइल के हमले का सामना?
BBC
इस्लामी क्रांति के बाद मौजूदा ईरानी शासन सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है. नए नेता के तौर पर क्या मोजतबा ख़ामेनेई इस इम्तिहान में खरे उतरेंगे?
एक ऐसा नेता ईरान की सत्ता का ताज पहनने जा रहा है, जिसका कभी पूरी तरह से परीक्षा से गुज़रना नहीं हुआ है. यह ऐसे समय होने जा रहा है, जब ईरान की धर्मतांत्रिक सरकार पिछले पाँच दशकों में अपनी सबसे बड़ी परीक्षा का सामना कर रही है.
इसराइल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के शुरुआती दौर में ही पिता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की हत्या की वजह से मोजतबा ख़ामेनेई को मानो सत्ता के शीर्ष तक खींच लिया गया है.
लेकिन 1979 की क्रांति के बाद ईरान के तीसरे सुप्रीम लीडर बनने जा रहे मोजतबा ख़ामेनेई के सामने जंग अस्तित्व की है.
88 शिया मुस्लिम धर्मगुरुओं और विशेषज्ञों की सभा द्वारा उनके चयन का एलान होते ही इस्लामी क्रांति के अनुयायियों की बड़ी भीड़ सड़कों पर उतर आई थी. ये भीड़ 'अल्लाहु अकबर' के नारे लगा रही थी.
ईरान के सभी सुरक्षा बलों ने अपने नए कमांडर-इन-चीफ की 'खून के आखिरी क़तरे तक' सेवा करने की शपथ ली.
बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
ईरान के सरकारी टीवी ने उनके नाम से दागी गई पहली मिसाइलों की तस्वीरें दिखाईं, जिन पर एक संदेश लिखा था - 'आपकी सेवा में, सैय्यद मोज़तबा'.

भारत में, एलपीजी गैस की कीमतों में इज़ाफ़ा होता दिख रहा है. इसकी सप्लाई को लेकर अनिश्चितता का दौर जारी है. एलपीजी की कीमतों और उपलब्धता पर दबाव बढ़ता दिख रहा है और देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं. यहां लोगों को कैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है? बीबीसी के रिपोर्टर्स ने देश के अलग-अलग हिस्सों में यही जानने की कोशिश की.












