
मॉरीशस की कहानी... कभी गिरमिटिया मजदूर बनकर गए थे भारतीय, आज 70% आबादी और PM भारतीय, भोजपुरी का जलवा... आखिर कैसे छा गए हिंदुस्तानी
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1834 से लेकर 1924 तक अंग्रेज भारत से मजदूरों को मॉरीशस ले जाते रहे. हजारों की संख्या में लोगों को वहां बसाया गया. बाद में कुछ व्यापारी भी भारत से मॉरीशस पहुंचे. धीरे-धीरे भारत से गए लोगों ने वहां अपना प्रभाव बढ़ाना शुरू किया और मुख्यधारा में शामिल होते गए.
मॉरीशस का भारत से गहरा नाता है. वहां की करीब 70 फीसदी आबादी भारतीय मूल की है. वहां की सियासत में भी भारतीय लोगों का ही प्रभाव है. धर्म के लिहाज से भी वहां करीब 50 फीसदी आबादी हिंदू धर्म को मानने वाली है. भारतीय भाषाओं, रीतिरिवाजों का चलन वहां आम है. अब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय यात्रा पर मॉरीशस में हैं तो ऐसे में ये जानना दिलचस्प है कि आखिर पश्चिमी हिंद महासागर के इस द्वीप में हिंदुस्तानी कैसे छा गए?
अंग्रेजों ने गिरमिटिया मजदूर के रूप में भारतीयों को बसाया
तमाम रिपोर्ट को खंगालने पर पता चलता है कि मॉरीशस की खोज ही 1502 में हुई. इसके बाद यहां कई लोगों ने अपना प्रभाव जमाने की कोशिश की. लेकिन इसे पहचान तब मिली जब 1715 में फ्रांस ने इसपर कब्जा किया. करीब 100 सालों तक फ्रांस का यहां कब्जा रहा लेकिन 1810 में ब्रिटेन ने इसको कब्जे में ले लिया.
यहीं से शुरू हुई कहानी...
जब ब्रिटिश का इस इलाके पर कब्जा हुआ तो इस इलाके को डेवलेप करने और खेती बाड़ी के काम के लिए भारत से मजदूरों को वहां बसाया गया. 1834 से लेकर 1924 तक अंग्रेज भारत से मजदूरों को मॉरीशस ले जाते रहे. हजारों की संख्या में लोगों को वहां बसाया गया. बाद में कुछ व्यापारी भी भारत से मॉरीशस पहुंचे. धीरे-धीरे भारत से गए लोगों ने वहां अपना प्रभाव बढ़ाना शुरू किया और मुख्यधारा में शामिल होते गए.
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