मेरठ: चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में पढ़ाया जाएगा गिल्ली डंडा का पाठ, जानिए वजह
AajTak
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के फिज़िकल एजुकेशन की बोर्ड ऑफ स्टडीज़ की बैठक में इस पर फैसला हुआ है. शारीरिक शिक्षा में अब गिल्ली-डंडा भी शामिल हो गया है.
बचपन में गांव-मोहल्ले की गलियों में गिल्ली डंडा खेलते हुए अक्सर बच्चों को देखा होगा हालांकि अब तो गिल्ली डंडा खेलने का चलन बहुत कम हो गया है. अब ना के बराबर ही बच्चे गिल्ली डंडा खेलते हुए नजर आते हैं लेकिन अब मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में गिल्ली डंडा छात्रों को पढ़ाया जाएगा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के फिज़िकल एजुकेशन की बोर्ड ऑफ स्टडीज़ की बैठक में इस पर फैसला हुआ है. शारीरिक शिक्षा में अब गिल्ली-डंडा भी शामिल हो गया है. नई शिक्षा नीति के तहत चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय और उससे जुड़े कालेजों में संचालित बीए शारीरिक शिक्षा का पाठ्यक्रम तय हो गया है. कला संकाय के अध्यक्ष प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी का कहना है कि पहली बार पाठ्यक्रम में परंपरागत खेलों को भी शामिल किया है. इनमें छात्र गिल्ली-डंडा जैसे खेलों के विषय में पढ़ेंगे और उनका अभ्यास भी करेंगे. यही नहीं अब हस्तिनापुर सेंक्चुरी को भी भूगोल के छात्र पढ़ सकेंगे. देश विदेश के भूगोल के साथ पहली बार स्थानीय भूगोल को भी चौधरी चरण सिंह विवि के छात्र पढ़ेंगे. विश्वविद्यालय के सिलेबस में पहली बार हस्तिनापुर सेंक्चुरी को भी शामिल किया गया है. जिसमें छात्रों को एक केस स्टडीज के तौर पर इसे समझाया जाएगा.More Related News

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












