
जापान में 30 मिनट के ओवरटाइम का भी मिलता है पूरा पैसा, भारतीय टीचर का पोस्ट वायरल
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जापान में काम कर रही एक भारतीय शिक्षिका ने बताया कि वहां अतिरिक्त काम के लिए पूरा भुगतान किया जाता है और सख्त नियम कर्मचारियों के वर्क-लाइफ बैलेंस की सुरक्षा करते हैं.
जापान की काम करने की संस्कृति दुनिया भर में मशहूर है. अब जापान में काम कर रही एक भारतीय शिक्षिका ने वहां के नियमों और काम के माहौल को लेकर ऐसा अनुभव शेयर किया है, जिसे जानकर लोग हैरान भी हैं और प्रभावित भी. उन्होंने बताया कि जापान में अतिरिक्त काम का पूरा पैसा मिलता है, चाहे वह सिर्फ 30 मिनट ही क्यों न हो. जापान अपनी अनुशासित और नियमों पर आधारित कार्य संस्कृति के लिए जाना जाता है. अब जापान में काम कर रही एक भारतीय शिक्षिका ने वहां के कामकाज से जुड़ी एक अहम बात सोशल मीडिया पर शेयर की है, जो लोगों का ध्यान खींच रही है.
आधे घंटे का भी मिलता है पैसा लखनऊ की रहने वाली प्रगति, जो पिछले सात महीनों से जापान में एक स्कूल में पढ़ा रही हैं, ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया. इस वीडियो में उन्होंने बताया कि जापान में ओवरटाइम यानी अतिरिक्त काम का पूरा और सही पेमेंट किया जाता है. प्रगति के मुताबिक, जापान में अगर कोई कर्मचारी सिर्फ 30 मिनट भी अतिरिक्त काम करता है, तो उसका भी भुगतान किया जाता है. यह नियम सख्ती से लागू होता है और इसमें कोई छूट नहीं दी जाती. उन्होंने बताया कि जापानी स्कूलों में काम के दिनों को लेकर भी साफ नियम हैं. शिक्षकों को लगातार पांच दिन से ज्यादा काम करने की अनुमति नहीं होती, जिससे उनका काम और निजी जीवन संतुलित बना रहे.सम्मान की संस्कृति प्रगति ने यह भी कहा कि अगर कोई शिक्षक अपनी मर्जी से अतिरिक्त काम करता है, तो सहकर्मी उसका सम्मान करते हैं और धन्यवाद भी कहते हैं. उन्होंने कहा- भले ही आपको ओवरटाइम का पैसा मिल रहा हो, फिर भी लोग आपका शुक्रिया अदा करते हैं.सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया इस वीडियो को अब तक करीब 35 लाख बार देखा जा चुका है और 16 लाख से ज्यादा लाइक मिल चुके हैं.लोगों ने वीडियो पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं दीं. एक यूजर ने लिखा- इन मानकों तक पहुंचने के लिए हमें अभी बहुत लंबा सफर तय करना है.दूसरे ने कहा- भारत में टीचर बनना अब भविष्य खराब करने जैसा लगता है. एक और यूजर ने मजाक में लिखा- हमारे यहां तो सिर्फ बायोमेट्रिक मशीन ही थैंक यू बोलती है. यह वीडियो जापान की कार्य संस्कृति और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर लोगों को सोचने पर मजबूर कर रहा है.

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