
मिडिल ईस्ट में तेल के बाद अब पानी-गैस के प्लांट पर वार... ईरान की नई रणनीति से मचेगा कोहराम!
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ईरान ने मिडिल ईस्ट में जंग का रुख बदल दिया है. अब निशाने पर पानी और ऊर्जा जैसे अहम संसाधन हैं. कुवैत के पानी प्लांट और अबू धाबी के गैस प्लांट पर हमलों से खाड़ी देशों में हड़कंप मच गया है. हालात ऐसे बन रहे हैं कि यह संघर्ष अब सीधे आम लोगों की जिंदगी को प्रभावित करने लगा है.
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच ईरान के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. अब ईरान ने रणनीति बदलते हुए सीधे जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पानी और गैस प्लांट को निशाना बनाना शुरू कर दिया है. ताजा घटनाओं में कुवैत और अबू धाबी में बड़े हमलों की खबर सामने आई है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में चिंता और तनाव बढ़ गया है.
अबू धाबी में हबशन गैस फैसिलिटी के पास एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा एक हमले को इंटरसेप्ट किया गया, लेकिन इसके बाद गिरे मलबे से आग लग गई. स्थानीय प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्लांट का संचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया. राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें और अफवाहों से बचें.
वहीं, कुवैत में हालात ज्यादा गंभीर नजर आ रहे हैं. यहां एक बड़े वॉटर डिसेलिनेशन प्लांट पर ईरानी हमले की पुष्टि हुई है. इस हमले में प्लांट के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है. कुवैत के लिए यह बेहद अहम है क्योंकि देश की करीब 90 प्रतिशत पीने का पानी इन्हीं प्लांट्स से आता है. इससे साफ है कि इस तरह के हमले सीधे आम नागरिकों की जिंदगी को प्रभावित कर सकते हैं.
इसके अलावा कुवैत के मीना अल-अहमदी ऑयल रिफाइनरी पर भी ड्रोन हमले किए गए, जिससे कई जगह आग लग गई. दमकल विभाग आग पर काबू पाने में जुटा है. खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों में भी खतरा बना हुआ है. बहरीन में सायरन बजे, सऊदी अरब ने कई ड्रोन मार गिराने का दावा किया, जबकि यूएई में भी एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय किया गया.
गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध अब अपने पांचवें हफ्ते में प्रवेश कर चुका है और इसका असर वैश्विक स्तर पर दिखने लगा है. ईरान और पश्चिमी देशों के बीच संघर्ष और गहरा गया है. अमेरिका और इज़रायल लगातार ईरान के ठिकानों पर हवाई हमले कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद ईरान की जवाबी कार्रवाई जारी है.
सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है, जहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस गुजरता है. ईरान की पकड़ और हमलों के कारण इस रास्ते पर खतरा बढ़ गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद इस मुद्दे पर बैठक करने जा रही है, जहां होर्मुज की सुरक्षा पर चर्चा होगी.

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