
मामा का घर, राजतिलक से पहले वनवास... बयानों से किसे और क्या संदेश दे रहे हैं शिवराज सिंह चौहान
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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नए आवास को 'मामा का घर' नाम दिया है. उन्होंने एक कार्यक्रम में यह भी कहा है कि कई बार राजतिलक होते-होते वनवास भी हो जाता है. इस तरह के बयानों और संकेतों के जरिए शिवराज किसे और क्या संदेश दे रहे हैं?
मध्य प्रदेश में 'मोहन राज' के आगाज को अब 20 दिन से अधिक हो गए हैं लेकिन पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं. सूबे में सरकार की कमान मोहन यादव को सौंपे जाने के बाद शिवराज कभी खेत में ट्रैक्टर चलाते नजर आते हैं तो कभी लाडली बहनों के बीच. अब वो अपने बयान और नए सरकारी आवास को लेकर चर्चा में हैं. शिवराज ने अपने निर्वाचन क्षेत्र बुधनी में मुख्यमंत्री नहीं बन पाने को लेकर बयान दिया है.
उन्होंने कहा कि कई बार राजतिलक होते-होते वनवास भी हो जाता है. ऐसा किसी ना किसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए ही होता है. कोई बड़ा उद्देश्य होगा. शिवराज ने ये भी जोड़ा कि मेरी जिंदगी बहन-बेटियों और जनता-जनार्दन के लिए है. आंखों में आंसू नहीं रहने दूंगा, दिन-रात काम करूंगा. उन्होंने सीएम हाउस छोड़ने के बाद अपने आवास का पता भी बताया और ये भी कहा कि उसका नाम रख दिया है 'मामा का घर'.
शिवराज के इस सामान्य से दिखने वाले बयान के अपने निहितार्थ हैं. इसमें कसक है तो भविष्य की उम्मीद भी, जनसेवा का संकल्प है तो मामा वाली इमेज को सहेजने का रोडमैप भी. शिवराज कभी मध्य प्रदेश छोड़कर कहीं नहीं जाने की बात करते हैं तो अब राजतिलक से पहले वनवास, बड़ा उद्देश्य की बात कर रहे हैं. सवाल उठ रहे हैं कि शिवराज के मन में क्या है? उनके बयान और आवास का नाम किस बात का संकेत है?
किस बड़े उद्देश्य की बात कर रहे हैं शिवराज
दरअसल, राजतिलक से पहले वनवास का प्रसंग भगवान राम से ही जुड़ा है. अयोध्या में भव्य मंदिर तैयार हो रहा है और 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी है. वनवास के बाद राम लौटे और उनका राजतिलक भी हुआ. राम ने अश्वमेध यज्ञ भी किया और बड़े-छोटे राजाओं ने उनकी प्रभुसत्ता स्वीकार भी की.
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