
मान से मजूमदार तक... वो 8 हीरो जिन्होंने 'पर्दे के पीछे' से भारत को बनाया विश्वविजेता
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यह कहानी भारतीय क्रिकेट के उन कोचों की है जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर भारत को विश्व चैंपियन बनाया. चाहे 1983 के मान सिंह हों, जिन्होंने टीम को आत्मविश्वास दिया; 2000 के दशक में जॉन राइट, जिन्होंने टीम को नई दिशा दी; या 2007 के टी20 विश्वकप के हीरो कोच लालचंद राजपूत. लेकिन सबसे खास हैं अमोल मजूमदार...
एक तय तारीख है. बड़ा सा मैदान है, जहां हजारों की संख्या में दर्शक सांसें थामे बैठे हैं. हर ओर उत्साह का समंदर है. अनगिनत कैमरे हर पल को कैद कर रहे हैं. कुछ घंटों का खेल है जिसमें चुना जाना है एक नया विश्व विजेता. नतीजा आता है और विजेता खिलाड़ियों के नाम के आगे हमेशा के लिए दर्ज हो जाता है- वर्ल्ड चैम्पियन. इसके बाद कहानियों की बाढ़ है. जश्न है, इमोशन है. हीरोज की संघर्ष गाथा है.
लेकिन इस शोर और चमक के बीच एक शख्स है जो मौन है. कैमरों के फ्रेम से दूर, अखबारी सुर्खियों से नदारद, पर उसके चेहरे पर गहरी तसल्ली है. क्योंकि यह जीत सिर्फ खिलाड़ियों की नहीं, उसकी भी है. यह ख्वाब उसका भी था जिन्हें कि पूरा इन 11 लोगों ने किया है. वह शख्स है- कोच. वह जो खुद खेल में नहीं उतरता, लेकिन दूसरों को मैदान का योद्धा बनाता है. जो थकता नहीं, पर दूसरों में ताकत भरता है. जो खिलाड़ियों को गढ़ता है, उन्हें तोड़ता है, फिर जोड़ता है और अंत में उन्हें ऐसा चमकता सोना बना देता है, जिसकी रौशनी पूरी दुनिया देखती है.
यह कोच उस कुम्हार की तरह है जो मिट्टी को आकार देता है. हर चोट, हर दरार के बीच सुंदरता खोज लेता है. वह जानता है कि हर खिलाड़ी का मोल सिर्फ जीत में नहीं, बल्कि उस सफर में है जहां उसने हारकर सीखा, गिरकर संभला और अंत में पूरी दुनिया को झुकने पर मजबूर कर दिया. वह गुमनाम रहता है, मगर हर पदक पर उसके हाथों के निशान होते हैं. वह पर्दे के पीछे रहता है, मगर हर जीत उसकी गवाही देती है.
और आज, जब भारतीय बेटियों ने पहली बार वर्ल्ड चैम्पियन बनने का इतिहास रचा है, तो वक्त है ऐसे हीरोज की कहानी कहने का- जिनकी कोचिंग में भारत ने आठ बार आईसीसी का ताज उठाया है.
पहले कहानी मान सिंह की...
भारत में क्रिकेट की जर्नी की बात करते ही पहला पड़ाव 1983 आता है. वो साल जब हम पहली बार वर्ल्ड चैम्पियन बने थे. इस वर्ल्ड कप की अनगिनत यादें हैं. कई कहानियां हैं. खिलाड़ियों के किस्से हैं. लेकिन इन सबके बीच एक नाम है, जो शायद सबसे कम चर्चा में रहा. उसका नाम है पीआर मान सिंह. 1983 वर्ल्ड कप टीम के मैनेजर.

टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले पूर्व कप्तान रोहित शर्मा ने भारतीय टीम की सबसे बड़ी चुनौती को लेकर आगाह किया है. उनका मानना है कि ओस के कारण स्पिन और तेज गेंदबाजी के संतुलन को लेकर टीम मैनेजमेंट को मुश्किल फैसले लेने पड़ेंगे. कुलदीप यादव और वरुण चक्रवर्ती को एक साथ खिलाना या नहीं, यही भारत के लिए सबसे बड़ा सवाल होगा.












