
मल्लिकार्जुन खड़गे आज संभालेंगे कांग्रेस की कमान, सोनिया-राहुल समेत कई नेता रहेंगे मौजूद
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मल्लिकार्जुन खड़गे आज कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर पद संभालेंगे. कांग्रेस में 24 साल बाद गांधी परिवार से बाहर का कोई कांग्रेसी अध्यक्ष चुना गया है. उनका अध्यक्ष बनना परिवारवाद का आरोप लगाने वाली बीजेपी के लिए एक जवाब है. वहीं अध्यक्ष के तौर पर उनका कार्यकाल बहुत मुश्किलों भरा रहने वाला है. 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले यानी उनके सामने दो साल के भीतर कांग्रेस को फिर से जीवित करने की चुनौती है.
कांग्रेस के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे आज पदभार संभालेंगे. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में सुबह 10:30 बजे वह सोनिया गांधी, राहुल गांधी, छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में अध्यक्ष पद संभालेंगे. इससे पहले वह सुबह 8 बजे राज घाट, शांति वन, विजय घाट, शक्ति स्थल, वीर भूमि और समता स्थल जाएंगे. खड़गे ने मंगलवार को शाम 6 बजे पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह से उनके आवास पर जाकर मुलाकात की.
खड़गे ने थरूर को 6,825 वोंटों से हराया
कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ शशि थरूर ने दावा ठोका था. इस चुनाव में खड़गे ने शशि थरूर को 6,825 वोट से मात दी थी. खड़गे को 7897 वोट मिले थे. वहीं, शशि थरूर के खाते में 1072 वोट आए थे. मल्लिकार्जुन खड़गे के रूप में कांग्रेस को 24 साल बाद गांधी परिवार से बाहर का अध्यक्ष मिला है. इससे पहले सीताराम केसरी गैर गांधी अध्यक्ष रहे थे. कांग्रेस के 137 साल के इतिहास में अध्यक्ष पद के लिए 6वीं बार चुनाव हुए.
खड़गे के अध्यक्ष बनने के हैं कई मायने-
दलित वोट बैंक साधने की कोशिश: पिछले कुछ समय से कांग्रेस की राजनीति में दलित वोटबैंक पर खास जोर दिया जा रहा है. पंजाब चुनाव से ठीक पहले चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने वाला दांव कोई भूला नहीं है. चुनाव में तो कांग्रेस को इसका कोई फायदा नहीं मिला लेकिन चरणजीत सिंह चन्नी के साथ एक तमगा जरूर जुड़ गया- 'पंजाब के पहले दलित सीएम'. अब मल्लिकार्जुन खड़गे का कांग्रेस अध्यक्ष बनना भी पार्टी की दलित राजनीति को नई धार दे सकता है.
परिवारवाद के आरोप से मुक्ति: कांग्रेस को लेकर एक परसेप्शन बन गया है कि वह परिवारवाद की राजनीति करती है. इस परसेप्शन ने पार्टी को कई चुनावों में भारी नुकसान दिया है.

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