
'मजाक और मानहानि में फर्क जरूरी...', बीजेपी नेता गौरव भाटिया की याचिका पर हाईकोर्ट की टिप्पणी
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जस्टिस बंसल ने कहा कि अदालत को किसी मामले में एक्स-पार्टे (ex parte) आदेश देते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए. उन्होंने कहा, “हमें बहुत सावधान रहना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ऐसे मामलों में एक्स-पार्टे आदेश नहीं दिए जाने चाहिए. इसलिए मामले को 25 सितंबर को सुनवाई के लिए रखा गया है.”
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि राजनीति में रहने वाला व्यक्ति “थिक-स्किन्ड” होना चाहिए, लेकिन व्यंग्य (satire) और मानहानि (defamation) में अंतर करना जरूरी है. यह टिप्पणी जस्टिस अमित बंसल ने तब की जब अदालत ने बीजेपी नेता और वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया की उस याचिका पर सुनवाई की जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ मानहानिकारक सामग्री हटाने की मांग की थी.
मामला उस टीवी न्यूज शो से जुड़ा है, जिसमें भाटिया को कथित तौर पर कुर्ता पहनकर बिना पैंट/पायजामा के देखा गया था.
भाटिया के वकील ने अदालत को बताया कि वह शॉर्ट्स पहन रहे थे और कैमरे ने गलती से उनके शरीर का निचला हिस्सा दिखा दिया. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर यह तस्वीरें भाटिया की निजता का उल्लंघन करती हैं और आपत्तिजनक टिप्पणियां तुरंत हटाई जानी चाहिए.
जस्टिस बंसल ने कहा कि अदालत को किसी मामले में एक्स-पार्टे (ex parte) आदेश देते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए. उन्होंने कहा, “हमें बहुत सावधान रहना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ऐसे मामलों में एक्स-पार्टे आदेश नहीं दिए जाने चाहिए. इसलिए मामले को 25 सितंबर को सुनवाई के लिए रखा गया है.”
भाटिया के वकील ने यह भी दावा किया कि तस्वीर उनके घर की निजता में ली गई थी, इसलिए इसे उनकी सहमति के बिना साझा नहीं किया जाना चाहिए. इस पर जज ने कहा, “आपसे इंटरव्यू लिया गया था, कोई आपके घर में घुसकर नहीं आया.”
जस्टिस बंसल ने आगे कहा, “जब आप राजनीति में होते हैं, तो आपको थिक-स्किन्ड होना पड़ता है. हमें यह अलग करना होगा कि क्या टिप्पणी व्यंग्य है और क्या मानहानि. फिलहाल हमें आपत्तिजनक और व्यंग्यात्मक टिप्पणियों में अंतर करना होगा.”

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