
ब्लड क्लॉटिंग से बचने के लिए वैक्सीन में किया जा सकता है बदलाव, जर्मनी के वैज्ञानिकों ने किया बड़ा दावा
Zee News
जर्मनी के गोइथे यूनिवर्सिटी और उल्म यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कहा है कि यह समस्या एडिनोवायरस वेक्टर में है. यह एक सामान्य वायरस है जिसके जरिए वैक्सीन शरीर में प्रवेश कर सकती है.
नई दिल्ली: कोरोना महामारी से निपटने के सबसे महत्वपूर्ण हथियार वैक्सीन में भी बदलाव किया जा सकता है. एस्ट्राजेनेका कंपनी की बनाई कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद दुनिया के कई देशों से ब्लड क्लॉटिंग यानी रक्त के थक्के जमने की शिकायत सामने आई थी, जिसके बाद कंपनी को काफी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा था. लेकिन जर्मनी के वैज्ञानिकों ने इस परेशानी से निपटने के लिए रास्ता सुझाया है, ताकी वैक्सीन के इस साइड इफेक्ट से बचा जा सके. जर्मनी के गोइथे यूनिवर्सिटी और उल्म यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कहा है कि यह समस्या एडिनोवायरस वेक्टर में है. यह एक सामान्य वायरस है जिसके जरिए वैक्सीन शरीर में प्रवेश कर सकती है. गोइथे यूनिवर्सिटी के एक प्रफेसर डॉक्टर रॉल्फ मार्सचालेक ने ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स से बातचीत में कहा कि ऑक्सफर्ड की कोविशील्ड वैक्सीन इसलिए समस्या कर रही है क्योंकि यह एडिनोवायरस वेक्टर वैक्सीन है. ऑक्सफर्ड की वैक्सीन में नए वायरस के जेनेटिक मटीरियल का इस्तेमाल एडिनोवायरस के जीन्स के साथ मिलाकर किया गया है ताकि रोग प्रतिरोध क्षमता को बढ़ाया जा सके.
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