
'बौखलाहट में फैसले ले रही बीजेपी', JMM ने राष्ट्रपति से की संविधान हत्या दिवस की अधिसूचना वापस लेने की मांग
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JMM का आरोप है कि देश में लोकतंत्र की हत्या पर पहली मुहर तब लगी थी जब 25 मई 2014 को बतौर पीएम नरेंद्र मोदी ने शपथ ली थी. आर्थिक आपातकाल तब लगा था जब 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी करके लोगो को बैंक और एटीएम के सामने सड़क पर खड़ा कर दिया गया था. कोरोना काल में संपूर्ण लॉकडाउन नागरिक आपातकाल था. तब लाखों लोग सड़क पर मरने को मजबूर थे.
झारखंड में इंडिया ब्लॉक के अहम घटक JMM ने केंद्र द्वारा 25 जून को संविधान हत्या दिवस मनाने की अधिसूचना का विरोध किया है. पार्टी ने राष्ट्रपति से इस अधिसूचना को रद्द यानी निरस्त करने की भी मांग की है. पार्टी के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य का आरोप है कि बीजेपी बौखला गई है. दरअसल वो 400 का आंकड़ा पार करके संविधान बदलना चाहती थी लेकिन 303 से भी नीचे 240 पर ही रह गई. लिहाजा अब बौखलाहट में फैसले ले रही है.
सुप्रियो का कहना है कि चीन से युद्ध और पाकिस्तान से युद्ध के वक्त भी इमरजेंसी यानी आपातकाल लगा था, 1962 और 1971 में. 25 जून 1975 को संविधान की धारा 352 के तहत आपातकाल लगा था. 2 साल तक नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को सस्पेंड किया गया था. बेशक ये काला अध्याय था लेकिन फैसला परिस्थितियों के हिसाब से और संविधान के तहत लिया गया था. भाजपा ने सविधान के अनुच्छेद 365 का प्रयोग कर कई बार राष्ट्रपति शासन लगाया वो भी आपातकाल है.
JMM ने नोटबंदी को बताया 'आर्थिक आपातकाल'
पार्टी का आरोप है कि देश में लोकतंत्र की हत्या पर पहली मुहर तब लगी थी जब 25 मई 2014 को बतौर पीएम नरेंद्र मोदी ने शपथ ली थी. आर्थिक आपातकाल तब लगा था जब 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी करके लोगो को बैंक और एटीएम के सामने सड़क पर खड़ा कर दिया गया था. कोरोना काल में संपूर्ण लॉकडाउन नागरिक आपातकाल था. तब लाखों लोग सड़क पर मरने को मजबूर थे.
बीजेपी सरकार पर साधा निशाना
जेएमएम ने कहा, 'तीन काले कृषि कानून को लाकर किसान आपातकाल भी लगाया गया. सैकड़ों किसान मरे थे. मणिपुर जब जल रहा था तब आदिवासियों पर आपातकाल लगाया गया. फिर नीट घोटाले ने छात्रों पर आपातकाल लगा दिया. हाथरस और मणिपुर की घटना महिला आपातकाल थी. PSU को औद्योगिक घरानों को बेचने की मुहिम विकास के खिलाफ आपातकाल है. सभी संवैधानिक संस्थाओं पर हमला संविधान के खिलाफ आपातकाल है.'

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