
बॉम्बे HC का फैसला- हनी बाबू को ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया जाए, आज होंगे शिफ्ट
AajTak
दिल्ली यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर हनी बाबू पुणे के एल्गार परिषद मामले में आरोपी हैं. कोर्ट के आदेश के बाद गुरुवार को उन्हें एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया जाएगा. हनी बाबू इस महीने की शुरुआत में कोरोना संक्रमित हो गए थे.
बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में आरोपी और दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) के एसोसिएट प्रोफेसर हनी बाबू को इलाज के लिए मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती होने की अनुमति दे दी है. हनी बाबू ने बुधवार सुबह हाई कोर्ट का रुख करते हुए कोरोना से संक्रमित होने के बाद आंख में हुए संक्रमण के लिए चिकित्सीय सहायता की मांग की थी. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हनी बाबू को गुरुवार को पुलिस सुरक्षा में ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया जाना चाहिए. वहां उनके इलाज और उन्हें दी जाने वाली दवाओं का खर्च वह तथा उनके परिजन उठाएंगे. साथ ही कोर्ट ने कहा कि परिवार के सदस्यों को अस्पताल प्रोटोकॉल का पालन करते हुए मरीज और डॉक्टरों के साथ संवाद करने की अनुमति दी जाएगी.
कोर्ट ने पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली बनाने पर जोर दिया ताकि बिना नसबंदी वाले कुत्तों की रिपोर्टिंग हो सके. 28 जनवरी को सरकारों की ओर से सॉलिसिटर जनरल अपनी दलीलें प्रस्तुत करेंगे. कोर्ट ने एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट के पॉडकास्ट पर नाराजगी जताई और मामले की गंभीरता को रेखांकित किया. ये सुनवाई आवारा कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता को जाति के आधार पर अपमानित करने की स्पष्ट मंशा होनी चाहिए। पटना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एफआईआर और आरोप पत्र में जाति-आधारित अपमान के अभाव को रेखांकित किया। कोर्ट ने एससी एसटी एक्ट की धारा 3(1) के प्रावधानों को दोहराते हुए कहा कि केवल अपशब्दों का प्रयोग अपराध नहीं बनता।

भारतीय जनता पार्टी ने नितिन नबीन को अपना 12वां राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है. सोमवार को चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंच पर उन्हें निर्वाचन पत्र सौंपा गया. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह समेत पार्टी के प्रमुख नेता मौजूद थे. पीएम मोदी ने नितिन नबीन को बधाई देते हुए कहा कि वे उनके बॉस हैं और अब वे सभी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. देखें PM मोदी के संबोधन की बड़ी बातें.

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार का आधा टर्म नवंबर 2025 में पूरा हो चुका है, जिससे स्पेकुलेशन बढ़ा. होम मिनिस्टर जी परमेश्वर भी फ्रे में हैं, लेकिन मुख्य जंग सिद्धारमैया-डीके के बीच है. पार्टी वर्कर्स में कन्फ्यूजन है, लेकिन हाई कमांड का फोकस यूनिटी पर है. क्या 29 जनवरी का समन टसल खत्म करेगा या नया ड्रामा शुरू होगा? देखना बाकी है.









