
बिहार के बाहुबली आनंद मोहन की रिहाई सही या गलत? 3 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
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बाहुबली नेता आनंद मोहन की रिहाई को गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी.कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया ने चुनौती दी है. उमा कृष्णैया ने अपनी अर्जी में आरोप लगाया है कि बिहार सरकार ने 10 अप्रैल 2023 के संशोधन के जरिए पूर्वव्यापी प्रभाव से बिहार जेल नियमावली 2012 में संशोधन किया है. ये पूर्वव्यापी उचित और विधि सम्मत नहीं है.
बिहार के बाहुबली नेता आनंद मोहन की रिहाई को चुनौती देने वाली अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट 3 नवंबर को सुनवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को मामले की सुनवाई नहीं हो पाई. यह याचिका गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी.कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया की ओर से दायर की गई है. उमा कृष्णैया ने अपनी अर्जी में आरोप लगाया है कि बिहार सरकार ने 10 अप्रैल 2023 के संशोधन के जरिए पूर्वव्यापी प्रभाव से बिहार जेल नियमावली 2012 में संशोधन किया है. ये पूर्वव्यापी उचित और विधि सम्मत नहीं है.
आनंद मोहन को छूट का लाभ देने के लिए सरकार ने लिया फैसला सरकार ने ऐसा इसलिए किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दोषी आनंद मोहन को छूट का लाभ दिया जाए. साल 1994 में गोपालगंज के तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट जी कृष्णैया को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था. इसी मामले मे आनंद मोहन को उम्रकैद की सजा मिली थी.
'यह पूरे देश के लिए अन्याय' बिहार की नीतीश सरकार ने कारा अधिनियम में बदलाव करके आनंद मोहन समेत 26 कैदियों को रिहा किया था. आनंद मोहन की रिहाई के बाद से आईएएस अधिकारी जी कृष्णैया का परिवार लगातार नीतीश सरकार के इस फैसले पर विरोध जता रहा है. आनंद मोहन की रिहाई को जी कृष्णैया की बेटी ने दुखद बताया था. उन्होंने कहा था कि यह हमारे लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए अन्याय है.
परिवार ने जताया था विरोध आनंद मोहन की रिहाई के बाद से आईएएस अधिकारी जी कृष्णैया का परिवार लगातार नीतीश सरकार के इस फैसले पर विरोध जता रहा है. आनंद मोहन की रिहाई को जी कृष्णैया की बेटी ने दुखद बताया था. उन्होंने कहा था कि यह हमारे लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए अन्याय है. जी कृष्णैया की पत्नी उमा देवी ने कहा था, जनता आनंद मोहन की रिहाई का विरोध करेगी, उसे वापस जेल भेजने की मांग करेगी. आनंद मोहन को रिहा करना गलत फैसला है. सीएम नीतीश को इस तरह की चीजों को बढ़ावा नहीं देना चाहिए. अगर वह (आनंद मोहन) भविष्य में चुनाव लड़ेंगे तो जनता को उनका बहिष्कार करना चाहिए. मैं उन्हें (आनंद मोहन) वापस जेल भेजने की अपील करती हूं.

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