
बाइडेन के बाद अब ऋषि सुनक पहुंचे इजरायल, हमास से जारी जंग के बीच नेतन्याहू से करेंगे मुलाकात
AajTak
हमास से जारी जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के बाद ब्रिटिश पीएम ऋषि सुनक इजरायल दौरे पर पहुंच गए हैं.
हमास से जारी जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के बाद ब्रिटिश पीएम ऋषि सुनक इजरायल दौरे पर पहुंच गए हैं. इससे पहले जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज ने इजरायल के प्रति अपना समर्थन दिखाने के लिए वहां का दौरा किया था.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक इजरायल के साथ एकजुटता दिखाने के लिए इजरायल पहुंचे हैं. यहां वे पीएम नेतन्याहू से मुलाकात करेंगे. ब्रिटिश पीएमओ के बयान के मुताबिक, सुनक इजरायल पर हमास के आतंकवादी हमले की निंदा करेंगे. इसके अलावा बीते दो हफ्तों से चल रहे युद्ध में जान गंवाने वाले लोगों के लिए संवेदना व्यक्त करेंगे. ब्रिटिश पीएमओ के बयान के अनुसार, सुनक इस बात पर भी जोर देंगे कि किसी भी नागरिक की मौत एक त्रासदी है. वह साथी नेताओं से कहेंगे कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के रूप में हमास के बर्बर आतंकवाद को क्षेत्र में संघर्ष को बढ़ाने के लिए उत्प्रेरक नहीं बनने देना चाहिए.
ऋषि सुनक ने गाजा के अस्पताल पर हुए हमले को क्षेत्र और दुनियाभर के नेताओं के लिए संघर्ष को अधिक खतरनाक रूप से बढ़ने से रोकने के लिए एक साथ आने का महत्वपूर्ण क्षण बताया. इजरायल की अपनी यात्रा पर सुनक गाजा में मानवीय गलियारे को जल्द से जल्द खोलने पर जोर देंगे. इस बयान के मुताबिक, जब ऋषि सुनक इजरायल में होंगे, उसी समय विदेश मंत्री जेम्स क्लेवरली मिस्र, तुर्की और कतर में रहेंगे. इसके अलावा रक्षा मंत्री ग्रांट शॉप्स ने बुधवार को वाशिंगटन में अमेरिकी समकक्ष लॉयड ऑस्टिन से मुलाकात की थी.
7 अक्टूबर को हमास के हमले के बाद से गाजा पट्टी में जंग जारी है. जहां हमास लगातार इजरायल पर रॉकेट दाग रहा है. वहीं, इजरायल जवाबी कार्रवाई में गाजा पट्टी में हमास के ठिकानों पर एयर स्ट्राइक कर रहा है. इस जंग में अब तक 4900 लोगों की मौत हुई है. हमास के हमलों में इजरायल में 1400 लोग मारे गए हैं. जबकि इजरायल के हमलों में 3500 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए हैं. जबकि 13 हजार से ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं.
अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस समेत तमाम पश्चमी देशों ने इजरायल में हमास के हमले की निंदा की है. साथ ही इजरायल की गाजा पट्टी में कार्रवाई को सही ठहराया है. इतना ही नहीं अमेरिका और ब्रिटेन ने इजरायल के खिलाफ अन्य देशों के युद्ध में उतरने की आशंका को देखते हुए अपने लड़ाकू विमान और वॉरशिप भी इजरायल बॉर्डर के पास तैनात कर दिए हैं. ़
सुनक ने इजरायल को दी बड़ी मदद ब्रिटेन के पीएम सुनक ने हमास से युद्ध शुरू होने के बाद इजरायल की मदद के लिए एक जासूसी विमान, दो युद्धपोत, तीन मर्लिन हेलिकॉप्टर और मरीन कमांडो की कंपनी भेजी है. इनकी तैनाती भूमध्यसागर में की गई है. ताकि क्षेत्रीय संतुलन बनाया जा सके. ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने पिछले दिनों कहा था कि वो इजरायल की मदद के लिए रॉयल नेवी का टास्क ग्रुप भेज रहे हैं. इन्हें अगले हफ्ते भूमध्यसागर के लिए रवाना कर दिया जाएगा. इस मिलिट्री पैकेज में एक P8 एयरक्राफ्ट, सर्विलांस एसेट्स, दो रॉयल नेवी शिप- RFA लाइम बे और RFA आर्गस, तीन मर्लिन हेलिकॉप्टर्स और रॉयल मरीन कमांडो की एक कंपनी शामिल है.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









