
बांग्लादेश: बीएनपी की वापसी का भारत के साथ संबंधों पर क्या असर पड़ेगा?
BBC
क़रीब दो दशक बाद बीएनपी के सत्ता में लौटने को बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. लेकिन इसका भारत-बांग्लादेश के रिश्तों पर क्या असर होगा?
शुक्रवार 13 फ़रवरी को मतगणना पूरी होने के बाद यह साफ़ हो गया कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) बांग्लादेश में अगली सरकार बनाने की ओर बढ़ रही है.
पार्टी ने इस ऐतिहासिक चुनाव में संसद की दो-तिहाई से ज़्यादा सीटों पर जीत दर्ज की है.
बीएनपी के नेता तारिक़ रहमान, पिछले 17 वर्षों से लंदन में स्वैच्छिक निर्वासन में थे और हाल ही में बांग्लादेश लौटे हैं. उनका देश का अगला प्रधानमंत्री बनना तय माना जा रहा है.
इस चुनाव में जमात-ए-इस्लामी दूसरे स्थान पर रही. इसके साथ ही बांग्लादेशी मतदाताओं ने आम चुनाव के साथ कराए गए जनमत संग्रह में व्यापक संवैधानिक सुधारों को भी मंज़ूरी दी है.
साल 2024 में हुए छात्र प्रदर्शनों के बाद बांग्लादेश का ये पहला चुनाव है.
उन प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को पद छोड़ना पड़ा था और उन्होंने भारत में शरण ली थी.
हसीना को शरण दिए जाने को लेकर भारत और बांग्लादेश के संबंधों में पिछले कुछ महीनों से तनाव बना हुआ है. लेकिन तनाव और तल्ख़ी की कई वजहें और भी हैं.

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