
बांग्लादेश: बढ़ता उत्पीड़न, घटती जनसंख्या... 8 फीसदी रह गए हिन्दू, मुस्लिमों की आबादी 85 से 92% हुई
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बांग्लादेश में हिन्दुओं की घटती आबादी की सबसे बड़ी वजह धार्मिक उत्पीड़न, हिंसा और पलायन है. बांग्लादेश के इतिहास के 54 सालों में हिन्दू डेमोग्राफी का स्पेस लगातार सिकुड़ता गया है. 1974 की बांग्लादेश की पहली जनगणना में हिन्दुओं की आबादी लगभग 14 फीसदी थी जो अब घटकर 7.5 फीसदी रह गई है. जबकि मुस्लिमों की जनसंख्या में तेज उछाल दर्ज किया गया है.
बांग्लादेश जब बना तो उस वक्त वहां की कुल आबादी में हिन्दुओं का प्रतिशत 20 से 22 प्रतिशत था. तब बांग्लादेश में हिन्दुओं की आबादी 1 करोड़ से 1.5 करोड़ के बीच थी. 1971 से 2025 के बीच 54 साल में बांग्लादेश सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक और डेमोग्राफिक बदलावों से होकर गुजरा. इसका सबसे नकारात्मक असर वहां की हिन्दू आबादी पर पड़ा.
अगर बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी 1971 से 2025 तक वैश्विक औसत दर (लगभग 1.1% प्रति वर्ष) से बढ़ती, तो 2025 में वहां लगभग 2.17 करोड़ (21.7 मिलियन) हिंदू होते. लेकिन 1971 में जिस बांग्लादेश में हिन्दू वहां की कुल आबादी का 22 फीसदी थे, वहां अब कुल आबादी का 8 फीसदी से भी कम रह गए हैं.
2022 की जनगणना के अनुसार बांग्लादेश की कुल आबादी लगभग 17 करोड़ थी. इसमें हिन्दुओं की जनसंख्या 1 करोड़ 30 लाख के आस पास थी. 2025 तक जनसंख्या वृद्धि और माइग्रेशन के आधार पर बांग्लादेश में अनुमानित हिन्दू आबादी 1 करोड़ तीस लाख से एक करोड़ 50 के आस पास हो सकती है. ये बांग्लादेश की कुल आबादी का लगभग 7.5-8% है.
54 साल में घटती गई हिन्दू आबादी
यानी कि पिछले 54 सालों में विज्ञान, आधुनिक सुख-सुविधा में प्रगति के बावजूद बांग्लादेश में हिन्दुओं की आबादी ज्यों की त्यों रही. अगर प्रतिशत आधार पर देखा जाए तो जो हिन्दू 1971 में बांग्लादेश की आजादी का 22 प्रतिशत थे वे अब घटकर 7.5 प्रतिशत तक रह गए.
आज़ाद बांग्लादेश में पहली जनगणना 1974 में हुई थी, जब कुल आबादी में हिंदुओं की संख्या 13.5% थी. यह प्रतिशत 1981 में घटकर 12.1%, 1991 में 10.5%, 2001 में 9.3% और 2011 की जनगणना में 8.5% हो गई. ये आंकड़े साफ तौर पर दिखाते हैं कि आजादी के बाद से बांग्लादेश में हिंदू आबादी लगातार कम हो रही है.

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