
बजरंग दल कार्यकर्ता का कत्ल और PFI कनेक्शन... सुहास शेट्टी हत्याकांड में 11 आरोपियों के खिलाफ NIA की चार्जशीट
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कर्नाटक में बजरंग दल सदस्य सुहास शेट्टी हत्याकांड NIA की जांच में एक बड़ी साजिश के रूप में सामने आया है. जांच एजेंसी ने बताया कि यह कोई सामान्य वारदात नहीं थी, बल्कि समाज में खौफ फैलाने की सोची-समझी आतंकी प्लानिंग थी. NIA ने 11 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है.
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने कर्नाटक में बजरंग दल के कार्यकर्ता सुहास शेट्टी की बेरहमी से की गई हत्या के मामले में बड़ा कदम उठाया है. NIA ने इस मामले में शामिल 11 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. यह चार्जशीट बुधवार को कर्नाटक के बेंगलुरु स्थित NIA की विशेष अदालत में पेश की गई. इसमें हत्याकांड की साजिश का पर्दाफाश किया गया है.
NIA ने अपने बयान में कहा कि यह कोई सामान्य हत्या नहीं थी, बल्कि एक टारगेटेड किलिंग थी. इसके जरिए समाज में डर और दहशत का माहौल बनाता था. जांच एजेंसी के मुताबिक, 1 मई 2025 की दोपहर सात हमलावर तलवारों और चाकुओं से लैस होकर सुहास शेट्टी पर टूट पड़े थे. उन्होंने उनको सरेआम मौत के घाट उतार दिया. इस कांड की वजह से पूरे देश में गुस्से का माहौल बन गया.
गृह मंत्रालय के निर्देश पर NIA ने यह मामला अपने हाथ में लिया था. जांच के दौरान एजेंसी ने पाया कि शेट्टी की हत्या के पीछे एक गहरी साजिश रची गई थी. सुहास शेट्टी की हर गतिविधि को महीनों तक ट्रैक किया गया. हत्यारे उनकी दिनचर्या, रास्ते और कार मूवमेंट तक पर नजर रख रहे थे. 1 मई को आरोपियों ने दो कारों में बैठकर सुहास शेट्टी की इनोवा कार का पीछा किया.
NIA की जांच में पता चला कि आरोपियों ने सुहास शेट्टी की इनोवा कार का पहले जानबूझकर एक्सीडेंट करवाया और फिर दूसरी गाड़ी से टक्कर मारकर उसके सभी रास्ते बंद कर दिए. कार के अंदर से सुहास जैसे ही बाहर निकले, हमलावरों ने पीछा कर उन पर तलवारों और चाकुओं से हमला बोल दिया. उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई. इस हत्या को एक आतंकी साजिश करार दिया गया है.
जांच एजेंसी के मुताबिक, यह पूरी साजिश प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के पूर्व सदस्यों ने की थी. मुख्य साजिशकर्ता के तौर पर अब्दुल सफवान सफवान उर्फ कलावरू सफवान का नाम सामने आया है. उसके साथ नियाज उर्फ निया, मोहम्मद मुसामिर उर्फ महामेद मुसामीर उर्फ मोहम्मद उर्फ मुजम्मिल, नौशाद उर्फ वामनजूर नौशाद उर्फ छोटे नौशाद उर्फ छोटू, और आदिल महरूफ थे.
आदिल महरूफ ने इस हत्याकांड के लिए फंडिंग की थी. इस रकम का इस्तेमाल न केवल लॉजिस्टिक्स में हुआ, बल्कि उन आरोपियों को भर्ती करने में भी जिनकी या तो पीड़ित से पुरानी दुश्मनी थी या जिन्हें पैसे का लालच था. NIA की रिपोर्ट में इस हत्या को डर फैलाने की रणनीति बताया गया है. यह वारदात सबके सामने इसलिए की गई ताकि समाज में एक वर्ग विशेष के बीच आतंक फैलाया जा सके.

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