
फेक पुलिस, वारंट और 10 लाख की श्योरिटी... आजतक ने डिजिटल अरेस्ट रैकेट का किया भंडाफोड़
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हाल के महीनों में डिजिटल अरेस्ट स्कैम मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है. इस स्कैम में ठग सरकारी अधिकारी, खासतौर पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सदस्य बनकर हाई-प्रोफाइल लोगों और अधिकारियों को निशाना बना रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने
पिछले कुछ महीनों में देश में डिजिटल अरेस्ट स्कैम के मामलों में काफी बढ़ोतरी देखी जा रही है. इसमें हाई-प्रोफाइल प्रोफेशनल्स, ब्यूरोक्रेट्स, जज, बिजनेसमैन और यहां तक कि सेना के अधिकारी तक को निशाना बनाया जा रहा है. इस स्कैम में अक्सर ठग अपने आपको सरकारी अधिकारी के रूप में पेश करते हैं, और खासतौर पर वे किसी जांच एजेंसियों से होने का दावा करते हैं.
वे फोन कॉल के जरिए से पीड़ितों से संपर्क करते हैं और बाद में व्हाट्सएप और स्काइप पर वीडियो कॉल करके पीड़ित के साथ ठगी करते हैं. अपने हालिया "मन की बात" प्रोग्राम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों को इस स्कैम से सावधान रहने की सलाह दी थी. उन्होंने लोगों को इस तरह के स्कैम का सामना करने पर "रुको, सोचो और एक्शन लो" का मंत्र भी दिया. पीएम मोदी ने यह भी कहा कि कानून में "डिजिटल अरेस्ट" जैसी कोई चीज नहीं है.
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हाल ही में, आजतक की सीनियर एसिस्टेंट एडिटर ऋचा मिश्रा डिजिटल अरेस्ट स्कैम का शिकार हुई थीं. पत्रकार को एक कूरियर कंपनी से कॉल आया था, जिसने झूठा दावा किया कि उनका आधार नंबर ड्रग्स वाले पार्सल से जुड़ा हुआ है. ठग ने काफी देर तक उन्हें फोन पर रखा, और उन्हें पता चला कि वह डिजिटल अरेस्ट का शिकार हुई हैं.
इंडिया टुडे स्टिंग ऑपरेशन
डिजिटल अरेस्ट के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए, इंडिया टुडे की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने एक स्टिंग ऑपरेशन किया. जांच तब शुरू की गई जब एक कूरियर कंपनी ने इंडिया टुडे के रिपोर्टर से कॉन्टेक्ट किया और दावा किया कि उनके नाम का एक पार्सल मुंबई में फंस गया है. दावे के मुताबिक, डीएचएल कर्मचारी होने के दावे के साथ फोन कॉल में स्कैमर ने बताया कि पार्सल मुंबई से बीजिंग भेजा गया था, जिसकी डिलीवरी नहीं हो पाई.

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