
फूलन देवी की बहन के बहाने अखिलेश का 'डबल-M' दांव, बीजेपी को क्या दे पाएंगे चोट?
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सपा प्रमुख अखिलेश यादव 2027 की सियासी जंग फतह करने के लिए अपने समीकरण को दुरुस्त करने में जुट गए हैं. सपा के महिला सभा के प्रदेश अध्यक्ष पद पर फूलन देवी की बहन रुक्मिणी देवी की नियुक्ति हुई है, जिसके जरिए अखिलेश ने डबल-एम दांव चला है.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए भले ही अभी एक साल का समय बचा हुए हो, लेकिन सियासी समीकरणों को साधे जाने लगे हैं. बेहमई नरसंहार के साढ़े चार दशक के बाद फूलन देवी यूपी की सियासत में अहम बनी हुई है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने 'पीडीए' फॉर्मूले को मजबूती से बनाए रखने के लिए पूर्व सांसद फूलन देवी की बड़ी बहन रुक्मिणी देवी निषाद को समाजवादी महिला सभा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है.
अखिलेश यादव ने महिला सभा के प्रदेश अध्यक्ष नियुक्ति की है, जिसे आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों को देखते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. फूलन देवी की बहन रुक्मिणी देवी के बहाने अखिलेश यादव ने 'डबल-M'दांव चला है.
सपा ने महिला नेतृत्व को सशक्त बनाने को लेकर एक बड़ा बदलाव किया है, जिसके सहारे एक तरफ महिलाओं को साधने के तो दूसरी तरफ मल्लाह समुदाय को सियासी संदेश दिया है. रुक्मिणी देवी मल्लाह समुदाय से आती हैं, जो बीजेपी के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ है. ऐसे में अखिलेश यादव ने सपा को 2027 के चुनाव में चोट देने के लिए फूलन देवी की बहन पर बड़ा दांव खेला है.
फूलन देवी की बहन के बहाने महिला वोटर को संदेश फूलन देवी की बहन रुक्मिणी देवी की नियुक्ति को पार्टी की महिला भागीदारी बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. रुक्मिणी देवी का सपा से पुराना जुड़ाव रहा है. वह संगठन के लिए जमीनी स्तर पर सक्रिय रूप से काम करती रही हैं. अखिलेश यादव ने पिछले दिनों उन्हें एक स्कॉर्पियो गाड़ी भी उपलब्ध कराई थी ताकि क्षेत्र में दौरा कर सकें.
रुक्मिणी देवी निषाद जालौन के शेखपुर गुड्डा (पुरवा) गांव से हैं. वो काफी समय से सामाजिक एवं राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रही हैं. उनकी पहचान चर्चित दस्यु सुंदरी और बाद में सांसद रहीं फूलन देवी की बड़ी बहन के रूप में रही है, जिससे उन्हें जातीय और सियासी दोनों स्तरों पर पहचान बनाई है. फूलन देवी को सियासत में लाने का काम मुलायम सिंह यादव ने किया है और सपा से सांसद रही है.
फूलन देवी की बहन को अखिलेश ने आगे कर अतिपिछड़ी जाति की महिलाओं को सियासी संदेश दिया है. फूलन देवी के साथ सामंतवादियों ने काफी अत्याचार किए थे, जिसके चलते वो बंदूक उठाई थी और सामंतवाद के खिलाफ संघर्ष किया था. दलित और पिछड़ी जाति के महिलाओं के बीच फूलन देवी की अपनी लोकप्रियता रही है, जिन्हें मल्लाह समुदाय अपने मसीहा के तौर पर देखा था. सपा की इस कोशिश को फूलन देवी के बहाने सूबे के मल्लाह समुदाय को राजनीतिक संदेश देने के तौर पर देखा.

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