
केरल में PM और चुनाव आयोग के AI वीडियो पर बवाल, भ्रामक कंटेंट के लिए X और यूजर हैंडल पर केस दर्ज
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केरल में प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग के AI वीडियो को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. PM और चुनाव आयोग को गलत तरीके से दिखाने पर X और एक यूजर हैंडल के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. पुलिस इस मामले की जांच कर रही है. पढ़ें पूरी कहानी.
केरल के तिरुवनंतपुरम में एक AI-जनरेटेड वीडियो को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. इस वीडियो में प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग (ECI) को कथित तौर पर भ्रामक और अपमानजनक तरीके से दिखाया गया था. इस मामले में केरल पुलिस की साइबर विंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) और एक यूजर हैंडल के खिलाफ केस दर्ज किया है. पुलिस का कहना है कि यह वीडियो चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकता था और इससे समाज में गलत संदेश फैल सकता था.
केरल पुलिस की साइबर विंग ने इस मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए X प्लेटफॉर्म और एक विशेष हैंडल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. यह मामला तिरुवनंतपुरम सिटी के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ है. पुलिस के अनुसार, यह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाया गया था और इसमें देश के प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग को गलत तरीके से पेश किया गया. इस तरह का कंटेंट लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख को नुकसान पहुंचा सकता है.
जिस वीडियो को लेकर विवाद हुआ है, उसमें चुनाव आयोग के एक पत्र का जिक्र किया गया है. इस पत्र पर कथित तौर पर बीजेपी के केरल यूनिट की मुहर लगी थी, जो बाद में एक बड़ी राजनीतिक बहस का कारण बन गया. चुनावी माहौल में इस तरह की घटनाएं संवेदनशील होती हैं और इसका सीधा असर मतदाताओं की सोच पर पड़ सकता है. पुलिस ने इस पहलू को गंभीरता से लिया है.
पुलिस के अनुसार, यह वीडियो अभी तक उस X हैंडल से हटाया नहीं गया है, जहां इसे पोस्ट किया गया था. अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने प्लेटफॉर्म को कंटेंट हटाने के लिए निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद वीडियो का प्रसार जारी रहा. इससे स्थिति और गंभीर हो गई और पुलिस को कानूनी कार्रवाई करनी पड़ी.
इस पूरे मामले की जानकारी पुलिस को आधिकारिक चैनलों के माध्यम से मिली थी. इसमें चुनाव आयोग (ECI) भी शामिल है, जिसने इस कंटेंट पर आपत्ति जताई थी. पुलिस ने बताया कि शुरुआती जांच में पाया गया कि वीडियो आम लोगों को भ्रमित कर सकता है और इससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर असर पड़ सकता है.
पुलिस ने अपने बयान में कहा कि इस तरह का कंटेंट न केवल लोगों को गुमराह करता है, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को भी कमजोर करता है. खासकर चुनाव के समय इस तरह की सामग्री का प्रसार बेहद खतरनाक माना जाता है. इससे सामाजिक तनाव और अव्यवस्था फैलने की आशंका भी रहती है.

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