
फास्ट, स्मार्ट और न्यू इंडिया का विजन... वंदे भारत ट्रेनों को PM मोदी ही क्यों दिखाते हैं हरी झंडी?
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लेकिन पीएम मोदी ऐसा क्यों करते हैं. वह रेलव मंत्री अश्विनी वैष्णव को हरी झंडी क्यों नहीं दिखाने देते. बेशक वंदे भारत एक्सप्रेस शोस्टॉपर है लेकिन क्या पीएम मोदी को खुद हर बार इन्हें हरी झंडी दिखानी चाहिए. विपक्ष का आरोप है कि उनमें क्रेडिट लेने की भूख है. लेकिन क्या यही इसका जवाब है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भोपाल से वंदे भारत एक्सप्रेस की पांच ट्रेनों को हरी झंडी देकर रवाना किया. पीएम मोदी वंदे भारत एक्सप्रेस की हर ट्रेन का शुभारंभ करते हैं. 2019 में जब से वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत हुई है. रेल मंत्री की जगह प्रधानमंत्री मोदी ही इन ट्रेनों को हरी झंडी दिखाते हैं. सवाल है क्यों?
पूछने वाली बात है कि पीएम मोदी रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव को हरी झंडी क्यों नहीं दिखाने देते? बेशक वंदे भारत एक्सप्रेस सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है लेकिन विपक्ष उन पर इसका पूरा क्रेडिट लेने का आरोप लगाता रहा है. लेकिन क्या यही इस सवाल का जवाब है?
इस सवाल का एक सरल जवाब यह हो सकता है कि मोदी प्रधानमंत्री हैं और वह यह खुद तय कर सकते हैं कि उन्हें किन कार्यक्रमों में शामिल होना है. पीएम मोदी इन ट्रेनों को जिस तरह की प्राथमिकता देते हैं उसे समझा जा सकता है. उन्होंने पिछले साल दिसंबर में बंगाल के हावड़ा को जलपाईगुड़ी से जोड़ने वाली वंदे भारत ट्रेन को वर्चु्अली हरी झंडी दिखाई थी. यह वह समय था जब उनकी मां हीराबा का निधन हो गया था लेकिन फिर भी उन्होंने बिना शेड्यूल में बदलाव के इसे हरी झंडी दिखाई थी.
लेकिन वंदे भारत को लेकर उनकी प्राथमिकता और प्रतिबद्धता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि रेलवे की आय घटी है और दुर्घटनाएं बढ़ी हैं और यह आमतौर पर अपर्याप्त आधुनिकीकरण की वजह से हुआ है.
साल 2013 में देश में नरेंद्र मोदी की शख्सियत में उभार के प्रमुख कारणों में से एक कारण उनका आशावादी बातें करना रहा है. शायद यही वजह है कि सरकार वंदे भारत के जरिए वोट भुनाना चाहती है. वंदे भारत ट्रेन की अधिकतम स्पीड 160 किलोमीटर प्रतिघंटा है. यह देश की अन्य पैसेंजर ट्रेनों की स्पीड (50 किलोमीटर प्रतिघंटा) की तुलना में बहुत अधिक है.
लेकिन क्या वंदे भारत के पीछे कोई राजनीतिक सोच है? यकीनन है. वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें न केवल भारत में बनी हैं बल्कि इसके नाम को भी राष्ट्रीय भावना से जोड़कर रखा गया है. अगर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव अकेले वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाते हैं तो हो सकता है कि ज्यादा लोगों का ध्यान इसकी और ना जाए. जब पीएम मोदी खुद इससे जुड़ जाते हैं तो यकीनन एक बड़ी आबादी इससे जुड़ जाती है. पीएम मोदी यह दिखाना चाहते हैं कि विकास, आधुनिकीकरण और कनेक्टिविटी सिर्फ चर्चा में आने वाले शब्द नहीं हैं.

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