
'प्रमुख मुद्दों पर साथ मिलकर करेंगे काम...', G7 सम्मेलन में PM मोदी से मुलाकात के बाद बदले जस्टिन ट्रूडो के सुर
AajTak
कनाडा के पीएम ने पत्रकारों द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई उनकी मुलाकात और बातचीत के बारे में पूछे जाने पर कहा- मैं इस महत्वपूर्ण, संवेदनशील मुद्दे के विवरण में नहीं जा रहा हूं, जिस पर हमें कार्रवाई करने की आवश्यकता है. दोनों देशों ने आने वाले समय में कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दों से निपटने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है.
पीएम नरेंद्र मोदी की G7 शिखर सम्मेलन के मौके पर कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के साथ बैठक हुई थी. इस मुलाकात के बाद भारत के साथ संबंधों को लेकर ट्रूडो के सुर बदल गए हैं. उन्होंने कहा कि भारत के साथ कनाडा के रिश्ते सुधर रहे हैं और दोनों देश महत्वपूर्ण मुद्दों पर साथ काम करने को लेकर प्रतिबद्ध हैं. जस्टिन ट्रूडो ने इटली में तीन दिवसीय जी7 शिखर सम्मेलन के अंतिम दिन एक संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही.
कनाडा के पीएम ने पत्रकारों द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई उनकी मुलाकात और बातचीत के बारे में पूछे जाने पर कहा, 'मैं इस महत्वपूर्ण, संवेदनशील मुद्दे के विवरण में नहीं जा रहा हूं, जिस पर हमें कार्रवाई करने की आवश्यकता है. दोनों देशों ने आने वाले समय में कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दों से निपटने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है. मैंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जिन पर हमें साथ मिलकर काम करने की जरूरत है और हम ऐसा करेंगे.'
जी7 समिट में मिले पीएम मोदी और ट्रूडो
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर शुक्रवार को जस्टिन ट्रूडो के साथ हाथ मिलाते हुए एक तस्वीर पोस्ट की थी, जिसके कैप्शन में लिखा था, 'जी 7 शिखर सम्मेलन में कनाडाई पीएम से मुलाकात हुई'.खालिस्तान समर्थक उग्रवाद पर दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव बढ़ने के बाद दक्षिणी इटली के अपुलीया में आयोजित बैठक में पीएम मोदी और जस्टिन ट्रूडो के बीच यह पहली मुलाकात थी. उनकी आखिरी मुलाकात सितंबर में भारत में जी20 शिखर सम्मेलन के मौके पर हुई थी.
कनाडाई प्रधानमंत्री के कार्यालय ने शुक्रवार शाम की बैठक के बाद एक बयान में कहा, 'दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों पर संक्षिप्त चर्चा की, जिसके दौरान ट्रूडो ने पीएम मोदी को उनके दोबारा चुने जाने पर बधाई दी'. जस्टिन ट्रूडो से जब पत्रकारों ने हरदीप सिंह निज्जर के मुद्दे को उठाने पर सवाल पूछा तो उन्होंने इससे कन्नी काट ली. बता दें कि ट्रूडो द्वारा जून 2023 में कनाडा में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को भारत से जोड़ने के बाद सितंबर में नई दिल्ली और ओटावा के बीच राजनयिक संबंध एक नए निचले स्तर पर पहुंच गए.
हरदीप सिंह निज्जर को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक गुरुद्वारे के बाहर दो नकाबपोश लोगों ने गोली मार दी थी. आरोपों के कारण दोनों देशों को अपने खुफिया अधिकारियों को निष्कासित करना पड़ा, राजनयिक कर्मचारियों को कम करना पड़ा और व्यापार वार्ता रोकनी पड़ी. निज्जर की हत्या की जांच रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) द्वारा की जा रही है, जिसने मामले के सिलसिले में चार भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार किया है.

डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनका मानना है कि डेनमार्क के अधीन आने वाला यह अर्द्ध स्वायत्त देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसे पाने के लिए वे सैन्य जोर भी लगा सकते हैं. इधर ग्रीनलैंड के पास सेना के नाम पर डेनिश मिलिट्री है. साथ ही बर्फीले इलाके हैं, जहां आम सैनिक नहीं पहुंच सकते.

गुरु गोलवलकर मानते थे कि चीन स्वभाव से विस्तारवादी है और निकट भविष्य में चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने की पूरी संभावना है. उन्होंने भारत सरकार को हमेशा याद दिलाया कि चीन से सतर्क रहने की जरूरत है. लेकिन गोलवलकर जब जब तिब्बत की याद दिलाते थे उन्हों 'उन्मादी' कह दिया जाता था. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है यही कहानी.

यूरोपीय संघ के राजदूतों ने रविवार यानि 18 जनवरी को बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में आपात बैठक की. यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी के बाद बुलाई गई. जिसमें उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर कई यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात कही है. जर्मनी और फ्रांस सहित यूरोपीय संध के प्रमुख देशों ने ट्रंप की इस धमकी की कड़ी निंदा की है.

दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध जैसी स्थिति बनने की आशंका बढ़ रही है. अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय नीतियां विवादों में हैं, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की तुलना हिटलर की तानाशाही से की जा रही है. वेनेज़ुएला पर हमला करने और ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने की धमकी के बाद अमेरिका ने यूरोप के आठ NATO देशों पर टैरिफ लगाया है.

इस चुनाव में तकाईची अपनी कैबिनेट की मजबूत लोकप्रियता के सहारे चुनाव में उतर रही हैं. उनका कहना है कि वो ‘जिम्मेदार लेकिन आक्रामक’ आर्थिक नीतियों के लिए जनता का समर्थन चाहती हैं, साथ ही नए गठबंधन को भी स्थिर जनादेश दिलाना चाहती हैं. गौरतलब है कि ये चुनाव पिछले निचले सदन चुनाव के महज 18 महीने के भीतर हो रहा है. पिछला आम चुनाव अक्टूबर 2024 में हुआ था.








