
पुतिन के बाद जेलेंस्की की दिल्ली यात्रा संभव, क्या अमेरिका की जगह भारत संभालेगा पीस टॉक की कमान?
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दिसंबर के पहले हफ्ते में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आए. अब यूक्रेन के लीडर वोलोडिमिर जेलेंस्की भी दिल्ली आ सकते हैं. भारत उन चुनिंदा देशों में है, जिसने कट्टर विरोधियों के साथ भी संतुलन बनाए रखा. पुतिन की यात्रा के दौरान भी उसने शांति की बात की. क्या भारत रूस-यूक्रेन जंग में मध्यस्थता के लिए जमीन तैयार कर रहा है?
4 और 5 दिसंबर को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत यात्रा की. इस दौरान बहुत से अहम मुद्दों पर बात हुई और सहमति भी बनी. यही वो वक्त था, जब भारत ने खुद को शांति का समर्थक कहा. उस वक्त, जबकि रूस और यूक्रेन के बीच जंग जारी है, दिल्ली का यह बयान संतुलन के साथ-साथ कूटनीति भी दिखाता है. इसके मायने यह भी हो सकते हैं कि भारत इन देशों के बीच शांति वार्ता कराने के लिए तैयार है. यह कयास इसलिए भी तेज है क्योंकि रूस के बाद यूक्रेन के लीडर वोलोडिमिर जेलेंस्की की भी भारत यात्रा की संभावना है.
खबरें हैं कि जेलेंस्की अगले साल जनवरी में भारत आ सकते हैं. अगर ऐसा हुआ तो काफी बड़ी बात होगी. युद्ध शुरू होने के चार सालों में दोनों ही देश अमेरिका के अलावा और कहीं नहीं गए. जेलेंस्की जरूर यूरोप यात्रा करते रहे, लेकिन पुतिन ने इससे दूरी बनाए रखी. अब पुतिन के बाद अगर जेलेंस्की भी भारत विजिट करें तो संकेत गहरे हैं. यह सिर्फ भारत का कूटनीतिक संतुलन नहीं, बल्कि मध्यस्थता की कोशिश भी हो सकती है.
पिछले साल जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रूस के बाद यूक्रेन की यात्रा की थी. इस बीच यूरोप के कई देशों ने आरोप लगाया कि भारत तटस्थ है. हालांकि पुतिन के दौरे के दौरान पीएम मोदी ने साफ कहा कि भारत न्यूट्रल नहीं, बल्कि शांति के साथ है.
भारत रूस और यूक्रेन के बीच मध्यस्थता कर सकता है या नहीं, यह सीधे तौर पर दोनों पक्षों की राजनीतिक इच्छा और ग्लोबल माहौल पर तय है. फिर भी बीते समय में कई संकेत मिले हैं कि भारत को एक संभावित मध्यस्थ के तौर पर देखा जाने लगा है.
पहला संकेत भारत की लगातार स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी की नीति से मिलता है. भारत ने युद्ध के दौरान रूस के साथ अपने संबंध बनाए रखे, जबकि यूक्रेन से भी रिश्ता नहीं तोड़ा. इसने भारत को एक ऐसा देश बनाया जो किसी एक पक्ष की बात नहीं दोहराता, बल्कि युद्ध खत्म करने की अपील करता है. पीएम मोदी ने भी- यह युद्ध का युग नहीं है, जैसा संदेश देकर बातचीत के रास्ते खोलने की कोशिश की.
दूसरा संकेत कई कूटनीतिक बैठकों से मिलता है. रूस और भारत के रक्षा और विदेश मंत्रियों की वार्ताओं में दिल्ली ने बार-बार शांतिपूर्ण हल पर जोर दिया. यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने भी कहा कि भारत अगर मीडिएटर बने तो यूक्रेन उसका स्वागत करेगा.

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